पंजाब में मान सरकार का नशा विरोधी अभियान
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में फरवरी 2025 से शुरू हुआ “युद्ध नशियां विरुद्ध” अभियान अब सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है। दशकों से नशे की मार झेल रहे पंजाब ने पहली बार महसूस किया है कि सरकार पूरी ताकत से जनता के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री मान का साफ संदेश है—नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करना ही लक्ष्य है।
इस अभियान के तहत सरकार ने शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई है। 553 किलोमीटर लंबी पंजाब–पाक सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती ने तस्करी की कमर तोड़ दी है। नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब अपराधियों को कोई राजनीतिक या सामाजिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
28 दिसंबर तक के आंकड़े इस जंग की गंभीरता दिखाते हैं—29,046 मामले दर्ज, 42,224 आरोपी गिरफ्तार, 1,845 किलो से अधिक हेरोइन, 27 हजार किलो से ज्यादा चूरा पोस्त और 15.25 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है। यह सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सिस्टम में आए बदलाव का प्रमाण है।
सरकार ने नशे की जड़ पर चोट करते हुए गांव-गांव नशामुक्त ग्राम रक्षा समितियां गठित की हैं। अब तक 4,500 से ज्यादा गांव खुद को नशामुक्त घोषित कर चुके हैं। स्कूलों में नशा विरोधी शिक्षा और डी-एडिक्शन सेंटरों का सशक्तिकरण इस लड़ाई को स्थायी बना रहा है।
यह अभियान साबित कर रहा है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति और जन-सहयोग साथ आते हैं, तो सबसे बड़ी सामाजिक बुराई को भी हराया जा सकता है। |