जागरण संवाददाता, वाराणसी। किसी कार्य के लिए सिर्फ लक्ष्य तय करना महत्वपूर्ण नहीं होता अंजाम तक पहुंचाने के लिए जुनून जरूरी होता है...। आइटियंस अमित सिंह ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। जब प्रधानमंत्री ने 2021 में दस हजार कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने का आह्वान किया तो सबसे पहला एफपीओ बनाकर अपना नाम दर्ज कराया। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
खेती-बाड़ी में टेक्निकल सपाेर्ट के हमराही बने तो किसानों के उत्पादों का उचित कीमत दिलाने में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। मिलेट्स, मशरूम व मिल्क के उत्पादों को अब आयाम देने में जुटे हुए हैं। कहते हैं कि एक दौर था जब हम मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अंतिम श्रेणी का खाद्यान्न मानकर हम सब छोड़ दिए थे। अब यही किसानों की झोली भर रहा है।
अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सरकार की ओर से गेहूं का समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विटंल तो बाजरा का 2,775 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। हालांकि बाजार में बाजरा की कीमत 35 रुपये प्रति किलो से अधिक है। प्रोसेसिंग के बाद इसके उत्पाद की कीमत तीन से चार गुना अधिक है। आइटियंस अमित सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बाजरा, ज्वार, रागी, कुट्टू, सांवा, कंगनी व कुटकी व कोदो समेत अन्य मोटे अनाज (श्रीअन्न) को बढ़ावा देने की बात की तो उनका संसदीय क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं रहा।
कृषक उत्पादक संगठन एवं औद्योनिक विपणन सहकारी समिति लिमिटेड, टिकरी के नाम पर एफपीओ गठित कर 2,300 से अधिक किसानों को जोड़ा। इस समय बहुतायत किसान मोटे अनाज का उत्पादन कर रहे हैं। किसानों के उत्पाद की प्रोसेसिंग मेरे यूनिट में होती है। कोल्हू वाला सरसों तेल से लगायत अन्य उत्पाद। मिलेट्स यानी अलसी, बाजारा के लडडू की डिमांड तो देश विदेश तक है। मिल्क, मशरूम की भी प्रोसेसिंग हो रही है। कुछ किसानों का दूध अमूल को जाता है तो कुछ की यहीं प्रोसेसिंग के बाद छेना, पनीर बाजार तक जाता है।
फ्रेश मशरूम की पैकेजिंग होती है तो शेष आचार के इस्तेमाल में आता है। सब काशी सृजन ब्रांड से देश दुनिया में जा रहा है। एफपीओ का टर्न ओवर पांच करोड़ तक पहुंच गया है। किसानों के हाथ में पहले 100 रुपये आता था अब 200 से अधिक आ रहा। एक्सपोर्ट में सर्टिफिकेशन जरूरी: आइटिंयस अमित सिंह ने बताया कि पांच टन मोटे अनाज की प्रोसेसिंग मेरे यहां हो रही है।
अंतराष्ट्रीय बाजार तक भी पहुंचाया जा रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद ले जाने के लिए सर्टिफिकेशन जरूरी है। आगेर्निक होना जरूरी है। किसान इसके लिए अब आगे आ रहे हैं। मेरे यहां ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में किसानों को बराबर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इतना ही नहीं ड्रोन दीदी तक को मेरे यहां प्रशिक्षण दिया गया।
यूं बनता मिलेट्स लड्डू: तीसी, तिखूर, सोंठ, ड्राइ फूड, देसी घी, गुड आदि का इस्तेमाल होता है। खाने में स्वादिष्ष्ट होता है तो वहीं हर मौसम में फायदेमंद भी है। बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह ने दिखाई राह: आइटियंस अमित सिंह कहते हैं कि कभी इस क्षेत्र में आने को सोचा नहीं था लेकिन जब प्रधानमंत्री ने दस हजार एफपीओ बनाने का लक्ष्य तय किया तो बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह ने यह बात कही थी कि इस क्षेत्र में टेक्नीकल लोगों की जरूरत है। मैंने इच्छा जाहिर की और उन्होंने मार्गदर्शन किया। अब अमित युवाओं को स्वरोजगार राह दिखाने के संग रोल माडल बन रहे हैं। अमित कहते है कि युवाओं के लिए खेती बाड़ी में करियर बनाने का बहुत अवसर है। सिर्फ लक्ष्य तय करके आना होगा। |