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गांव के माहौल पर नजर जमाए था पारस, रूबी को लेकर बदलता रहा ठिकाना... यूं आया गिरफ्त में

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रूबी और पारस सोम। (फाइल फोटो)


जागरण संवाददाता, मेरठ।

कपसाड़ स्थित रजवाहे से रूबी को अगवा करने के बाद पारस सोम उसे लेकर अपनी रिश्तेदारी खतौली गया था। शाम को सुनीता की मौत की खबर मिलने पर दोनों दिल्ली चले गए, वहां एक होटल में रात गुजारी। उसके बाद वहां से अपने दोस्त के पास गुरुग्राम चले गए। मीडिया के जरिये गांव के माहौल पर पारस सोम नजर रखे हुए था।

गांव का माहौल बिगड़ने पर रूबी को गुरुग्राम से साथ लेकर ट्रेन से सहारनपुर पहुंच गया। यहां टपरी गांव में उसकी बहन रहती है। उनके घर पर शुक्रवार की रात बिताई। शनिवार को हरिद्वार के लिए ट्रेन में सवार हो गया। तभी पारस सोम ने अपने परिवार के बारे में झोलाछाप राजेंद्र से जानकारी ली। चर्चा है कि पारस ने दो साल पहले अपने पिता पर भी चाकू से हमला किया था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक कस्टडी में पारस सोम ने रूबी से प्रेम प्रसंग की बात कही है। उसने बताया कि इंटर कालेज में पढ़ते समय ही तीन साल पहले रूबी से प्यार हो गया था। दोनों ने ही साथ में भागने का निर्णय लिया था। परिवार के लोगों ने रूबी की शादी तय कर दी थी। सुनीता के विरोध करने पर हाथापाई में फरसे से हमला हो गया। पारस सोम और सुनील सोम को साथ लेकर देर रात पुलिस की टीमें हत्या में प्रयुक्त फरसा बरामद करने में जुटी हुई है। दोनों को रविवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया जाएगा।

एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि युवती के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। फिलहाल उसे आशा ज्योति केंद्र में महिला पुलिस की कस्टडी में रखा गया है। कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने ही युवती के बयान दर्ज किए जाएंगे। उसके बाद ही मुकदमे में आगे का निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल पारस और सुनील को सुनीता हत्याकांड में आरोपित बनाया जाएगा। युवती के बयानों को आधार बनाते हुए मुकदमे में अन्य धाराएं बढ़ा दी जाएंगी।
पारस फोन न करता तो पकड़ पाना था मुश्किल

मेरठ : मां की हत्या कर बेटी का अपहरण करने वाले पारस सोम और सुनील सोम को पकड़ने में पुलिस के पसीने छूट गए। दस टीमें 58 घंटे तक भी मुख्य आरोपित पारस का सुराग नहीं लगा पाईं। सर्विलांस और एसओजी की टीमें अफसरों को गुमराह करती रहीं। संयोग रहा कि पारस सोम ने ट्रेन के अंदर से सहयात्री का मोबाइल लेकर गांव के झोलाछाप राजेंद्र कुमार को काल कर दी। अगर पारस सोम काल नहीं करता तो उसे पकड़ना पुलिस के लिए मुश्किल था।

साफ है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह से खत्म हो चुका है। एलआइयू और इंटेलीजेंस की टीम भी सिर्फ नेताओं के आगमन की जानकारी जुटाती रही। शुक्रवार को परिवार के लोगों ने बेटी की बरामदगी होने तक मां के शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था। इस पर पूरे दिन घमासान चला था। बाद में सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम और विधायक अतुल प्रधान ने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए मनाया था।

एसएसपी डा. विपिन ताडा ने फरार आरोपितों की गिरफ्तारी और युवती की बरामदगी के लिए दस टीमों का गठन किया था। सर्विलांस, साइबर सेल, एसपी सिटी और एसपी देहात की एसओजी टीम और एसएसपी की एसओजी टीम के साथ सरधना थाने में पूर्व में तैनात रहे इंस्पेक्टरों की फौज भी खड़ी कर दी गई थी। सभी टीमें शीर्ष अफसरों को अंत तक गुमराह करती रहीं कि सुराग मिल गया है, जल्द ही सफलता मिल जाएगी। पर हकीकत यह है कि यह टीमें पारस का पता नहीं लगा पाईं।

शनिवार को शीर्ष अफसर खुद ही मैदान में उतरे। एसएसपी, डीआइजी और एडीजी ने मामले को संभाला। पारस ने जैसे ही गांव के झोलाछाप को काल की, तभी शीर्ष अफसरों के हस्तक्षेप से रुड़की पुलिस की मदद से रूबी को सकुशल बरामद करने के साथ पारस सोम को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के वाट्सएप ग्रुप में शाम सात बजे अफसरों ने मैसेज डालकर सभी टीमों को बताया कि आरोपित गिरफ्तार हो चुका है। एसएसपी डा. विपिन ताडा ने बताया कि पारस और रूबी मोबाइल का प्रयोग नहीं कर रहे थे। सीसीटीवी और मुखबिर तंत्र से दोनों की तलाश की जा रही थी।

मृतका सुनीता के पति सतेंद्र जाटव ने कहा कि बेटी रूबी के बरामद होने की सूचना उन्हें सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने दी है। उन्होंने अब तक बेटी को नहीं देखा है, न ही उनसे बात कराई गई। उन्होंने कहा कि जब तक बेटी उनके सामने न आ जाए और उससे बात न हो जाए, वह कैसे विश्वास करें कि मिल गई है।

उन्होंने कहा कि पुलिस उनकी बेटी पर दबाव बनाकर उल्टे-सीधे बयान दिलवा सकती है। बेटी बरामद हो गई है तो उन्हें सौंपा जाए। इसके बाद पुलिस उसके बयान ले।
बहन को तुरंत परिवार को सौंपे पुलिस

अपहृत किशोरी के भाई व इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले नरसी ने कहा कि बहन को हरिद्वार से बरामद करने की सूचना सीओ सरधना ने दी है। दोनों को मेरठ लेकर आने की बात बताई गई है। जब तक बहन से बात नहीं कराई जाएगी, तब तक वह बरामद हुई है या नहीं, वह नहीं मानते।

उन्होंने कहा कि बहन बरामद हुई तो पहले उसकी स्वजन से बात कराई जाए और मिलवाया जाए। पुलिस उसे डरा धमकाकर व गुमराह करके कुछ भी बयान दिलवा सकती है। उन्हें पुलिस के दावे व बात पर कोई विश्वास नहीं है।
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