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उत्तराखंड में डिजिटल गवर्नेंस से बढ़ेंगी सुविधाएं, अब सरकारी दस्तावेजों को बनाना होगा आसान

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मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी। फाइल फोटो



विकास गुसाईं, जागरण, देहरादून । उत्तराखंड में शासन-प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में डिजिटल गवर्नेंस एक मजबूत आधार के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार की ओर से विभिन्न विभागों में डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि सरकारी सेवाओं तक उनकी सीधी और सहज पहुंच भी सुनिश्चित हो रही है। अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को जोड़ा जा रहा है। यह कदम उत्तराखंड को तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। ये सभी बदलाव नए वर्ष में जनता को खासी राहत देंगे।  

प्रदेश सरकार ने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के उद्देश्य से डिजिटल गवर्नेंस माडल को लागू किया है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहां भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, वहां आनलाइन सेवाएं आमजन के लिए वरदान साबित हो रही हैं। अब लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन कार्ड, भूमि से जुड़े अभिलेख और विभिन्न योजनाओं के आवेदन घर बैठे आनलाइन किए जा सकते हैं। राज्य में ई-डिस्ट्रिक्ट, सीएम डैशबोर्ड, आनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली, भूलेख पोर्टल और डिजिटल भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया है। शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया अब आलाइन ट्रैक की जा सकती है, जिससे जवाबदेही भी बढ़ी है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी मदद मिल रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका
स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी डिजिटल तकनीक का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। टेलीमेडिसिन और आनलाइन पंजीकरण से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ई-लर्निंग प्लेटफार्म और डिजिटल कंटेंट से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो रही है। वहीं आपदा प्रबंधन में रियल-टाइम डेटा, अलर्ट सिस्टम और डिजिटल संचार माध्यमों से त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संभव हो पा रहा है। अब इस तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।

डिजिटल साक्षरता को मजबूत करने पर फोकस
नए वर्ष में सरकार का फोकस डिजिटल साक्षरता को और मजबूत करने पर भी है, ताकि समाज का हर वर्ग इन सेवाओं का लाभ उठा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि पर्वतीय इलाकों में भी आनलाइन सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही कामन सर्विस सेंटरों की भूमिका को और सशक्त किया जा रहा है। इससे डिजिटल खाई को पाटने में मदद मिलेगी।

प्रमुख भाषाओं में होगा दस्तावेजों का अनुवाद
आमजन को सरकारी दस्तावेजों को समझने में सबसे अधिक दिक्कतें होती है। ऐसे में अब डिजिटल उत्तराखंड पोर्टल में कई महत्वपूर्ण टूल जोड़े जा रहे हैं। इनमें एआइ पाणिनी सबसे महत्वपूर्ण है। इसकी मदद से विभिन्न सरकारी विभागों में उपयोग होने वाले दस्तावेजों, पत्राचार और रिपोर्ट का अनुवाद देश की सभी प्रमुख भाषाओं में किया जा सकेगा। इससे आमजन को दस्तावेजों को समझने में मदद मिलेगी।

बड़े दस्तावेजों व रिपोर्ट का बनेगा सार
पोर्टल में एक और टूल एआइ सारांश जोड़ा जा रहा है। यह टूल बड़े दस्तावेजों और रिपोर्ट का संक्षिप्त व सारगर्भित सार निकालने में मदद करेगा। इससे आमजन को सरकारी निर्णयों व योजनाओं को समझने में मदद मिलेगी।

दस्तावेजों का बनेगा आडियो
एआइ अभिलेख दस्तावेजों को आडियो में बदलने की सुविधा देगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से दृष्टिबाधित कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए उपयोगी साबित होगी। कामकाज के दौरान व्यस्त रहने वाले अधिकारी भी यात्रा करते समय जरूरी दस्तावेजों को सुनकर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही बुजुर्ग व अनपढ़ आसानी से इसे समझ सकेंगे।

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