LHC0088 • Yesterday 18:56 • views 184
अंतरिक्ष में डॉक्टर नहीं फिर भी NASA कैसे संभालता है मेडिकल इमरजेंसी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर एक गंभीर मेडिकल समस्या सामने आने के बाद NASA की अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत से जुड़ी तैयारियों की कड़ी परीक्षा हो गई। इस वजह से 2026 में होने वाला एक स्पेसवॉक रद करना पड़ा और जरूरत पड़ने पर क्रू को जल्दी पृथ्वी पर वापस लाने पर भी विचार किया गया।
ISS पर डॉक्टर नहीं, फिर भी इलाज संभव
NASA के मुताबिक, ISS पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं होता। इसके बजाय अंतरिक्ष यात्रियों को आपात चिकित्सा की खास ट्रेनिंग दी जाती है। वे जमीन पर मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों से टेलीमेडिसिन के जरिए सलाह लेते हैं।
हर क्रू के लिए अलग फ्लाइट सर्जन
NASA हर मिशन के लिए एक फ्लाइट सर्जन (स्पेस मेडिसिन डॉक्टर) नियुक्त करता है। यह डॉक्टर मिशन से पहले, मिशन के दौरान और मिशन के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत पर नजर रखता है।
NASA के अनुसार, ISS पर मजबूत मेडिकल स्टॉक और दवाइयों की सुविधा मौजूद है। क्रू को इन उपकरणों के इस्तेमाल की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है।
ब्लड क्लॉट का मामला
एक अंतरिक्ष यात्री में ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) बनने की स्थिति सामने आई। ऐसे में NASA ने दवाइयों का इस्तेमाल इस तरह सीमित रखा ताकि अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से पृथ्वी तक लौट सके।
अगर ISS पर इलाज संभव न हो, तो इमरजेंसी इवैक्यूएशन का विकल्प अपनाया जाता है। इसके लिए Soyuz या Crew Dragon कैप्सूल लाइफबोट की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं। कैप्सूल के पृथ्वी पर उतरते ही फ्लाइट सर्जन और मेडिकल टीम अंतरिक्ष यात्रियों को संभालने के लिए मौजूद रहती है।
ट्रेनिंग और टेलीमेडिसिन की भूमिका
हर अंतरिक्ष यात्री को मेडिकल रिस्पॉन्डर की ट्रेनिंग दी जाती है। उनके पास ट्रॉमा किट और अल्ट्रासाउंड मशीनें होती हैं जो आपात स्थिति में काम आती हैं। ISS पर मौजूद क्रू किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर सुरक्षित टेलीमेडिसिन नेटवर्क के जरिए फ्लाइट सर्जन से संपर्क कर सकता है।
ईरान में अशांति बढ़ी, इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच हिंसा के आरोप; अब तक 78 की मौत |
|