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नपेंगे घोटालेबाज: अमरोहा कोऑपरेटिव स्कैम की फाइनल रिपोर्ट तैयार, इन कर्मचारियों पर लटकी तलवार

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प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, अमरोहा। चुचैला कलां बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति में हुए लाखों के घोटाले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अब अफसरों को जांच टीम की रिपोर्ट का इंतजार है। सूत्रों की मानें तो मामले में दो तत्कालीन सचिव के अलावा जिला सहकारी बैंक के कई कर्मचारियों की गर्दन फंसी है। उन पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इधर अफसरों ने स्पष्ट कह दिया है कि जो भी दोषी होना, उसको बख्शा नहीं जाएगा।

गत सितंबर माह में चुचैला कलां समिति में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया था। किसानों की शिकायत पर अनंतिम जांच में घोटाले की पुष्टि हुई थी। यहां बता दे कि इस समिति से दो हजार से अधिक किसान सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं। अनंतिम जांच अपर जिला सहकारी अधिकारी उमेश कुमार व एडीओ राजकुमार ने की थी और अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी।

जांच समिति की रिपोर्ट पर एआर कोआपरेटिव ने दो लेखाकार विपिन कुमार व संजीव कुमार को दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अंतिम जांच के लिए चार सदस्य कमेटी गठित की थी। यह कमेटी अपर जिला सहकारी अधिकारी की अध्यक्षता में बनाई गई थी। कंप्यूटर से संबंधित रिकार्ड की जांच के लिए अलग से तकनीकी कर्मचारी को सहयोग के लिए लगाया था।

कमेटी द्वारा पिछले पांच साल तक का रिकार्ड खंगाला गया है। जांच पूरी हो चुकी है। अब कमेटी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसका पता चलने के बाद बैंक व समिति कर्मचारियों के दिलों की धड़कनें बढ़ गई हैं। इस सप्ताह कमेटी द्वारा अफसरों को जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

यह था पूरा मामला

चुचैला कलां सहकारी समिति के कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया। एक किसान के नाम से दो-दो चेक जारी कर लाखों रुपये का भुगतान हासिल किया। किसानों से कुछ धनराशि जमा कराकर डिस्चार्ज की रिपोर्ट तक दे दी। किसान समिति का कर्जदार रहा। लेकिन उसकी तहसील में बंधक जमीन मुक्त हो गई।

फर्द पर ऋण मुक्त अंकित हो गया। किसानों ने समिति से लिए ऋण का भुगतान कर दिया है, जिनके पास उनकी रसीदें हैं। यह धनराशि कर्मचारियों ने बैंक में जमा नहीं की गई। बैंक के पास भी रसीद नहीं है। इस घपलेबाजी का पर्दाफाश तब हुआ जब किसानों ने उच्चाधिकारियों को ऋण जमा करने की रसीद दिखाई।

इसके साथ ही उन्होंने बड़े घोटाले की आशंका जताते हुए मुरादाबाद स्थित डीआर सहकारिता वीर विक्रम से शिकायत कर जांच की मांग की। जिस पर डीआर सहकारिता ने घपलेबाजी की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की थी।

  


मामले की जांच पूरी हो गई है। जांच में जो भी कर्मचारी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

- वरुण अग्रवाल, एआर कोआपरेटिव





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