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PMFBY Scam: महोबा में योजना की आड़ में बड़ा घोटाला, वन विभाग की 285 बीघा भूमि में 16 जालसाजों ने फसल बीमा करा हड़पे लाखों

Chikheang Yesterday 20:26 views 664
  



जागरण संवाददाता, महोबा। PMFBY Scam: महोबा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में हुए करीब 40 करोड़ के घोटाले में जालसाजों ने जमकर खेल किया। नदियों, नालों, चकमार्ग, औद्योगिक क्षेत्र, पहाड़ों की जमीन का बीमा कराकर लाखों का भुगतान ले लिया। प्रमुख सचिव कृषि के रिपोर्ट तलब करने और सदर विधायक राकेश गोस्वामी के सदन में एसआइटी जांच का मुद्दा उठाने के बाद भी उच्च स्तरीय जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी। लेकिन रोज चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे है। सदर तहसील में 141 दिनों से मामले की सीबीआइ जांच को लेकर धरने पर बैठे जय जवान जय किसान संगठन के अध्यक्ष गुलाब सिंह ने जांच धीमी होने और मामले को दबाने के साथ ही डाटा में हेरफेर का आरोप लगाया है।


उन्होंने बताया कि तहसील कुलपहाड़ के ग्राम घुटई में वन विभाग की जमीन का रबी 2024 में बीमा करा लिया गया। उनके मुताबिक गांव का कुल क्षेत्रफल 1142 बीघा है। जिसमें वन विभाग की जमीन के 285 बीघा में 16 लोगों ने मसूर की पैदावार दिखाकर खेल किया। बीमा कराकर लाखों रुपये का क्लेम ले लिया गया और वास्तविक किसानों को इसकी भनक भी नहीं लग सकी।

आरोप है कि डाटा को छिपाया जा रहा है। 16 किसानों के नाम तो नजर आ रहे है और इनका भुगतान जूनागढ़, कुलपहाड़, पनवाड़ी व झांसी के बैंक खातों में होना दिख रहा है। लेकिन कितना भुगतान गया, इसे छिपाया गया है। जिससे किसानों को वास्तविक जानकारी न हो सके और घोटाले पर पर्दा डाला जा सके। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जिससे कृषि विभाग, बीमा कंपनी के साथ ही इसके असल दोषियों के नाम सामने आ सकें।

उपनिदेशक कृषि रामसजीवन कहते है जांच चल रही है। लगातार कार्रवाई हो रही है। बीमा कंपनी इफको टोकियो के जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी व महिला समेत अब तक 34 लोग जेल भेजे जा चुके है। शहर कोतवाली, चरखारी, कुलपहाड़, अजनर व थाना पनवाड़ी में छह मुकदमे दर्ज किए गए है।

27 अगस्त को बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक सहित नामजद व अन्य अज्ञात पर मुकदमा शहर कोतवाली में दर्ज हुआ था। कृषि विभाग के बीमा पटल सहायक अतुलेंद्र विक्रम को भी निलंबित किया जा चुका है। 24 सितंबर को जिला सत्र न्यायालय ने पांच आरोपितों की जमानत खारिज कर दी थी। दो जनवरी को बीमा कंपनी प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी की जमानत खारिज हुई।
इस तरह किया गया फर्जीवाड़ा

फसल बीमा में फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने कंपनी से सांठगांठ कर ऐसे गांवों को चुना, जहां चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। बीमा करने के लिए पोर्टल (प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल) पर भू-स्वामी व बटाईदार अपना बीमा करा सकता है। चकबंदी प्रक्रियावाले गांवों का डाटा प्रदर्शित नहीं होता, जिससे कोई भी 10 रुपये के स्टांप पर बटाईनामा बनवाकर जमीन पर बीमा करा सकता है। इसमें वह जो जानकारी भर देता है वह सही मानी जाती है। खाली स्टांप भी इसमें लगाया जा सकता है। उसी के कागजातों के आधार पर बीमा होता है। इसकी जांच बीमा कंपनी ही करती है। इसके बाद व्यक्ति टोल फ्री नंबर पर फोन कर नुकसान की जानकारी देता है। इसकी जांच भी बीमा कंपनी करती है और क्लेम पास कर भुगतान दे देती है। जाहिर है कहीं न कहीं बीमा कंपनी के लोग भी इसमें शामिल है। किसी भी मामले का सत्यापन नहीं किया गया। यदि सत्यापन कराया जाता तो शायद फर्जी भुगतान होने से बच जाता।
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