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National Youth Day 2026: स्वामी विवेकानंद जयंती पर क्यों सेलिब्रेट किया जाता है राष्ट्रीय युवा दिवस, पढ़ें उद्देश्य एवं इतिहास

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National Youth Day in Hindi 2026



एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। भारत के एक महान आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक और समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन का महत्व स्वामी विवेकानन्द जी के विचार और कार्यों को युवाओं के बीच पहुंचाना होता है ताकी देश के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा युवा पीढ़ी आगे आकर अपना योगदान दें और देश को नई ऊचाइंयों पर लेकर जाएं।
1985 से हुई थी इस दिन की शुरुआत

इस दिन को सेलिब्रेट किये जाने का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद की विचारों, मूल्यों और आदर्शों को बढ़ावा देना है। इस दिन को भारत सरकार की ओर से वर्ष 1984 में मान्यता दी गई थी। इसके बाद 1985 से प्रतिवर्ष स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप मनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य

यह दिन युवाओं को आत्मविश्वास, ऊर्जा और जिम्मेदारी का संदेश देता है। भारत सरकार की ओर से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के माध्यम से युवा शक्ति को देश के विकास से जोड़ने का प्रमुख उद्देश्य है।

राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 जनवरी को मनाया जाता है, जो आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है। 2026 में यह सोमवार को पड़ रहा है। इतिहासभारत सरकार ने 1984 में स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया, जो 1985 से मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को उनके विचारों से प्रेरित करना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए उत्साहित करना है।

  
स्वामी विवेकानंद का इतिहास

स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता में 12 जनवरी 1863 को हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। इनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। इनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाई कोर्ट के प्रसिद्ध वकील थे। नरेंद्र बाल्यावस्था से प्रतिभा के धनी थे। उन पर मां सरस्वती की कृपा थी। स्वामी जी को ईश्वर से बेहद ही लगाव था। 16 वर्ष की आयु में 1869 में स्वामी जी ने कलकत्ता विश्व विद्यालय के एंट्रेंस एग्जाम में बैठे और इस एग्जाम में उन्हें सफलता मिली। इसके बाद इसी विश्वविद्यालय ने उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इस दौरन उनकी भेंट परमहंस महाराज जी से हुई। इसके बाद स्वामी जी ब्रह्म समाज से जुड़े।
सन 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित धर्म सम्मेलन में स्वामी जी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इस सम्मेलन में स्वामी जी के भाषण की पूरी दुनिया में प्रशंसा की गई। इससे भारत देश को एक नई पहचान मिली। 4 जुलाई 1902 को बेलूर के रामकृष्ण मठ में ध्यानावस्था में महासमाधि धारण कर स्वामी जी पंचतत्व में विलीन हो गए।

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