बीसीसीआई के एक मामले को लेकर अनुराग ठाकुर पहुंचे कोर्ट
पीटीआई, नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पहले के एक आदेश में बदलाव की मांग की है। इस आदेश में उन्हें क्रिकेट बोर्ड के मामलों से जुड़े रहने से रोकने का निर्देश दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की पीठ ने अनुराग की याचिका पर दो सप्ताह बाद सुनवाई करने पर सहमति जताई। अनुराग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने पीठ को बताया कि दो जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अनुराग ठाकुर तत्काल प्रभाव से बीसीसीआई के कामकाज से खुद को अलग रखें और उनके विरुद्ध अवमानना तथा झूठी गवाही (परजरी) की कार्यवाही भी शुरू की गई थी।
संशोधन की है मांग
पटवालिया ने कहा कि यह आदेश मुझे सुने बिना पारित किया गया था। हालांकि, बाद में इस न्यायालय ने अवमानना और परजरी की कार्यवाही को समाप्त कर दिया। अब मैं चाहता हूं कि सीज एंड डिसिस्ट (कार्य से दूर रहने) संबंधी निर्देश में संशोधन किया जाए। पीठ ने पटवालिया से कहा कि इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी, जबकि बीसीसीआई से जुड़े अन्य सभी याचिकाओं और आवेदनों पर तीन सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।
अमीकस क्यूरी को मिले निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नियुक्त अमीकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह को निर्देश दिया कि वे सभी हस्तक्षेप और अंतरिम आवेदनों को मुद्दों के आधार पर अलग-अलग करें और उन्हें अदालत के समक्ष पेश करें। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो जनवरी 2017 को बीसीसीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) अध्यक्ष शशांक मनोहर को पत्र लिखने से जुड़े मामले में झूठा हलफनामा दाखिल करने के आरोप में अनुराग ठाकुर के विरुद्ध अवमानना और परजरी की कार्यवाही शुरू की थी।
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