राज्य ब्यूरो, लखनऊ। फाइलों में अटकी योजनाएं, वर्षों तक लंबित अनुमतियां और विभागों के बीच तालमेल की कमी, कभी उत्तर प्रदेश की पहचान मानी जाने वाली ये समस्याएं अब बीते दौर की बात बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) ने शासन की सोच, कार्यशैली और नतीजों तीनों को बदल दिया है। ‘प्रगति’ पोर्टल आज केवल समीक्षा तंत्र नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त प्रतीक बन चुका है।
अपने आवास पांच कालिदास मार्ग में प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से प्रेरित प्रगति मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति, तकनीकी माध्यम और जवाबदेही एक मंच पर आती हैं, तो परिणाम अपने आप सामने आते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और सहकारी संघवाद के जरिए जटिल से जटिल परियोजनाओं को भी समयबद्ध ढंग से पूरा करना संभव हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति मॉडल ने प्रदेश को देश का इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बना दिया है। राज्य के पास वर्तमान में 10.48 लाख करोड़ रुपये की 330 परियोजनाओं का देश का सबसे बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं तय समय-सीमा के भीतर पूरी हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर बैठकर निर्णय ले रहे हैं। इससे अनुमतियों और स्वीकृतियों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यूपी \“\“बाटलनेक\“\“ राज्य से \“\“ब्रेकथ्रू\“\“ राज्य में बदल चुका है। आज उत्तर प्रदेश \“\“फैसिलिटेटर\“\“ नहीं, बल्कि \“\“एक्सेलेरेटर\“\“ की भूमिका में है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफार्म ने टीम इंडिया स्पिरिट को मजबूत किया है और विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी नई गति दी है। इस मौके पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना भी उपस्थित थे।
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