search

कागजों में हाईटेक, हकीकत में कतारें: देश का सबसे व्यस्त IGI एयरपोर्ट डिजियात्रा के उपयोग में दूसरे नंबर पर

deltin33 Yesterday 17:56 views 668
  

प्रतीकात्मक तस्वीर।



गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। जिस डिजियात्रा को भविष्य की यात्रा का पर्याय, समय की बचत और कतारों से मुक्ति की बात कहकर देश की सबसे बड़ी आईजीआई एयरपोर्ट पर कभी खूब प्रचार किया गया, उसी एयरपोर्ट पर यात्री डिजियात्रा सुविधा का इस्तेमाल पूरी तरह से नहीं कर पा रहे हैं। आलम यह है कि यात्रियों की आवाजाही के मामले में देश में नंबर वन का तमगा होने के बाद भी देश का सबसे बड़ा आईजीआई एयरपोर्ट डिजियात्रा के उपयोग में दूसरे स्थान पर है।
पहले स्थान पर है बेंगलुरु एयरपोर्ट

पहले स्थान पर बेंगलुरु एयरपोर्ट है। बेंगलुरु एयरपोर्ट ने पिछले वर्ष जनवरी से नवंबर के बीच करीब 76.9 लाख यात्रियों द्वारा डिजियात्रा का उपयोग दर्ज किया, जबकि दिल्ली में यह संख्या 57.3 लाख रही। 2024 में भी बेंगलुरु 75.7 लाख उपयोगकर्ताओं के साथ आगे था, दिल्ली 63.4 लाख पर।
आखिर ऐसी स्थिति क्यों?

आप आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर जाएं। आप यहां गेट संख्या सात व आठ पर डिजियात्रा गेट की सुविधा होने के बाद भी डिजियात्रा गेट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यह स्थिति यहां लंबे समय से बनी हुई है। नतीजा यह होता है कि यात्री डिजियात्रा गेट के बजाय सामान्य गेट से टर्मिनल में प्रवेश के लिए मजबूरी में लंबी कतार में खड़े हो जाते हैं। इसी तरह टर्मिनल-1 पर आप यदि जाएंगे तो कई बार गेट काम करने के बाद भी आपको स्कैनिंग में दिक्कत आएगी।

टर्मिनल-3 पर पहले डिजियात्रा एप डाउनलोड करने के लिए, इसका इस्तेमाल समझने के लिए एक विशेष काउंटर बनाया गया था। यह गेट संख्या एक के सामने था, लेकिन समय के साथ इसे बंद कर दिया गया। यात्रियों का कहना है कि जब सरकार ही इसे लेकर सक्रिय नहीं है तो यात्रियों से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे मेगा-हब में डिजियात्रा को अपनाने की कम दर के पीछे के मुख्य कारण तकनीकी चुनौतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर की जटिलता और अपनाने में प्रचार की कमी है। एक और बात जिसे विशेषज्ञ बताते हैं कि वह यात्रियों की डेमोग्राफी को लेकर है। दिल्ली में यात्री ज्यादा विविध हैं। बुजुर्ग, छोटे शहरों से आने वाले परिवार जिनमें कई तकनीक से कम परिचित हैं या डिजिटल प्रक्रियाओं में संकोच करते हैं।
बेंगलुरु कैसे बन गया नंबर वन?

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजियात्रा की जब शुरुआत हुई थी, तब दिल्ली व बेंगलुरु दोनों एयरपोर्ट आगे थे, लेकिन बेंगलुरु ने तेजी से बढ़त बना ली। सबसे प्रमुख कारण यात्रियों की डेमोग्राफी है। बेंगलुरु भारत की आईटी राजधानी है, जहां ज्यादातर यात्री युवा, टेक-सेवी पेशेवर हैं। वे डिजिटल टूल्स और नए ऐप्स को जल्दी अपनाते हैं, जिससे डिजियात्रा का उपयोग स्वाभाविक रूप से ज्यादा हुआ।

दिल्ली में कई बार फेशियल स्कैन में लाइटिंग, एंगल, चेहरे पर मास्क या चश्मे की वजह से दिक्कत होती है। जिससे यात्री सामान्य कतार में लौटने को मजबूर होते हैं। बेंगलुरु में सिस्टम ज्यादा सुचारू और तेज चलता है, जहां डेडिकेटेड लाइनें बेहतर तरीके से मैनेज होती हैं और अनुभव सहज रहता है। दिल्ली में प्रचार और जागरूकता को लेकर भी कमी है। बेंगलुरु एयरपोर्ट ने डिजियात्रा के फायदों पर फोकस कर खूब प्रचार किया।
देश के 24 एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रा के लिए डिजियात्रा सर्विस

यह एप फेशियल रिकग्निशन तकनीक पर आधारित है। डिजियात्रा के बारे में सरकार का दावा है कि इसके इस्तेमाल से टर्मिनल में प्रवेश से लेकर बोर्डिंग तक की प्रक्रिया के दौरान लगने वाले कुल समय में लगभग आधे की बचत होती है। वर्तमान में देश के 24 एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रा के लिए डिजियात्रा की सुविधा है।

आईजीआई एयरपोर्ट पर रोजाना लगभग 1.10 लाख यात्री प्रस्थान के लिए पहुंचते हैं। इन यात्रियों में करीब 80 से 90 हजार यात्री घरेलू होते हैं, जो डिजियात्रा का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिलहाल आईजीआई एयरपोर्ट के तीनों टर्मिनल पर डिजियात्रा की सुविधा उपलब्ध है।

यह भी पढ़ें- आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-3 रोड पर भीषण रोड एक्सीडेंट, कैब और टाटा हैरियर की जोरदार टक्कर में चार घायल
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
461173

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com