मकर संक्रांति को लेकर पतंगों की बिक्री में तेजी। जागरण
जागरण संवाददाता, दरभंगा । मकर संक्रांति को लेकर पतंगों की बिक्री बाजारों में बढ़ गई है। मिथिलांचल में पतंगबाजी के शौकिया लोग हर कीमत की पतंग व लटाई खरीदने में लगे हुए हैं। बुधवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इसके नजदीक आते ही हर उम्र के लोगों में पतंगबाजी का खुमार चढ़ गया है।
बाजार भी रंग-बिरंगे पतंग से सजा हुआ है। बाजार के दुकानों में जो पतंग लटाई और मंझे वाले धागे नजर आ रहे हैं। लोग उसे मोल जोल कर खरीद रहे हैं। लहेरियासराय गुदरी बाजार ,कमर्शियल चौक ,बाकरगंज ,मोलागंज, रहमगंज,दरभंगा टावर,कटकी बाजार,कादिराबाद के दुकानों के मार्केट में शहर सहित आस-पास के प्रखंड से लोग पतंगों की खरीदारी करने आते हैं।
यहां दो रुपये से 550 रुपये तक के पतंग, लटाई और धागे मिल रहे हैं। इनकी खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी है। हालांकि, लोगों के बीच आज भी सबसे अधिक कागज से बनी पतंग की डिमांड है। इसके अलावा पन्नी से बने पतंग की भी खूब बिक्री हो रही हैं।
वही बच्चों से लेकर बुजुर्गों के बीच पतंगबाजी न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि यह लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती है। बाजार में विभिन्न प्रकार की पतंगें, मंझे और अन्य सामग्री उपलब्ध है।
आपरेशन सिंदूर ,हेप्पी न्यू इयर , हैप्पी मकर सक्रांति, मोटू पतलू, स्पाइडर मैन ,छोटा भीम, डोरीमान, मंकी, पवजी, बाज, बटरफ्लाई, एयरोप्लेन, पैराशूट, प्रिंटेड पतंग, कागज और कार्टून डिजाइन की पतंगों की सबसे अधिक मांग है। हाल ही में बड़े आकार की पतंगें लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं, जिनकी कीमत पांच रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक होती है।
आमतौर पर पतंगों की कीमत दो रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक होती है। सबसे ज्यादा बिकने वाली पतंग की कीमत छह ,दस एवं बारह रुपये कि है। वहीं लटाई की कीमत 20 रुपये से लेकर 12 सौ रुपये तक की है। लटाई प्लास्टिक और लकड़ी की होती हैं, जो छोटे, मीडियम और बड़े आकारों में मिल रही है। मांझे बाले धागे की की लंबाई 100 मीटर से लेकर 10,000 मीटर तक की है ।
अधिकतर धागे कोलकाता ,बंगाल में बनाए जाते हैं। इनकी कीमत पांच रुपये से शुरू होकर 12 सौ रुपये तक की है। 100 मीटर धागे की कीमत 10 रुपये होती है, जबकि 10 हजार मीटर धागे की कीमत तीन सौ से चार सौ रुपये तक निर्धारित है।वही थोक विक्रेताओं फुटकर विक्रेता को पतंगें आधे से भी कम दामों में मिलती है।
फुटकर विक्रेता इन्हें दुगने दाम पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं। पतंग धागे अधिकतर कोलकाता ,पटना ,बरेली में निर्मित होती है। पतंग का व्यापार मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर अधिक होता है ।
लहेरियासराय के पतंग दुकानदार कुमार अजय ने बताया की पतंगों का सीजन दिसंबर से लेकर मार्च तक रहता है। बंगाली टोला निवासी नवनीत कुमार ने बताया कि वे आठ वर्षों से पतंग उड़ाते हैं। उन्हें पतंग की लड़ाई करने में बहुत मजा आता है। |