बहादुर शाह जफर मार्ग से प्रतिबंध के बावजूद गुजरता ई-रिक्शा। जागरण
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सड़क सुरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग गैर पंजीकृत ई-रिक्शा चालकों को वाहन पंजीकरण पूरा करने के लिए एक महीने का समय देने पर विचार कर रहा है।
पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प के रूप में शुरू किए गए ई-रिक्शा अपनी धीमी गति, यातायात जाम में योगदान और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण शहर की सड़कों पर समस्या बनते जा रहे हैं।
दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 तक वाहन डैशबोर्ड पर 204131 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। हालांकि, अनुमानों के अनुसार वास्तविक संख्या इससे कई गुणा अधिक है।
कब से शुरू हो रही है योजना?
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गैर पंजीकृत ई-रिक्शा चालकों को पंजीकरण कराने के लिए आदेश जारी होने के बाद एक महीने का समय देने की योजना विचाराधीन है, ताकि सड़कों पर सुरक्षा के साथ आजीविका भी बनी रहे। योजना शुरू करने की तिथि अभी तय नहीं की गई है।
इस महीने की शुरुआत में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) के संबंध में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया, जो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी जिसकी आठ वर्षीय बेटी की एक गैर पंजीकृत ई-रिक्शा के पलटने से मृत्यु हो गई थी।
बैटरी से चलने वाले रिक्शा के नियंत्रण, सुरक्षित आवागमन और प्रबंधन के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि 2014 में बनाई गई ई-रिक्शा सेवा योजना के तहत, ये वाहन परिवहन वाहनों की श्रेणी में आते हैं।
ई-रिक्शा के फिटनेस प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त होने के बाद इन ई-रिक्शा को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के संबंधित नियमों के तहत फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
इसके अलावा विभाग ने 11 दिसम्बर 2014 को ई-रिक्शा के आवागमन को निर्धारित करने वाली एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें 236 सड़कों की सूची दी गई है, जहां ई-रिक्शा का चलना और पार्क करना प्रतिबंधित है। |
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