राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अदाणी समूह द्वारा मीरजापुर में स्थापित की जाने वाली 1600 मेगावाट क्षमता की तापीय परियोजना से 1500 मेगावाट बिजली खरीदने संबंधी पावर सप्लाई एग्रीमेंट (पीएसए) को विद्युत नियामक आयोग ने सशर्त हरी झंडी दे दी है। प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के माध्यम से 25 वर्षों तक पावर कॉरपोरेशन द्वारा खरीदी जाने वाली बिजली 5.38 रुपये प्रति यूनिट होगी।
हालांकि, परियोजना में फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) संयंत्र लगाए जाने से भारत सरकार द्वारा छूट देने पर आयोग ने होने वाली बचत का आकलन कर उपभोक्ताओं को लाभ देने की बात कही है। ऐसे में माना जा रहा है कि बिजली की दर कुछ कम हो सकती है।
अदाणी समूह ने एफजीडी नहीं लगाने से 270 करोड़ की बचत बताई है, जिसे आयोग ने अंतिम न मानते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को परियोजना के आरंभ से पूरा होने तक तिमाही वास्तविक बचत का आकलन कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने एफजीडी की अनिवार्यता समाप्त होने पर पावर कॉरपोरेशन और अदाणी समूह को आपसी समझ के आधार पर बचत का आकलन कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा था।
ऐसा न करने पर आयोग ने नाराजगी जताते हुए टिप्पणी भी की है कि आयोग कोई डाकघर या केवल मुहर लगाने वाला प्राधिकरण नहीं है। आयोग, उपभोक्ताओं के व्यापक हित में, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत उचित निर्णय लेने के लिए बाध्य है।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने नियामक आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात कर लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल कर कहा है कि एफजीडी नहीं लगाने के एवज में उपभोक्ताओं को लगभग 2000 करोड़ रुपये की बचत का लाभ मिलना चाहिए। कैपिटल कास्ट घटने से फिक्स्ड कास्ट व जीएसटी आदि से एनर्जी चार्ज में भी कमी आने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन तथा आपरेट (डीबीएफओओ) के तहत प्रस्तावित इस संयंत्र से प्रदेश को वर्ष 2030-31 से 1500 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है।
डीबीएफओओ एक ऐसी प्रणाली है जिसमें निजी कंपनी परियोजना का निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन खुद करती है। सरकार सिर्फ कोयला लिंकेज देती है और बिजली खरीदती है। |
|