संवाद सूत्र, शाहपुर (भोजपुर)। भोजपुरी समाज में माघ महीने को लेकर एक पुरानी और प्रचलित कहावत है, \“माघ के दिन बाघ जइसन\“। इसका अर्थ है कि माघ मास के दिन बाघ की तरह तेज, ऊर्जावान और असरदार होते हैं। यह कहावत केवल लोकविश्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि धर्म, प्रकृति और विज्ञान, तीनों के नजरिये से माघ मास की विशेषताओं को सटीक रूप से दर्शाती है। माघ मास न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह स्वास्थ्य, ऋतु परिवर्तन और प्राकृतिक संतुलन का भी प्रतीक माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास में भगवान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करते हैं। इस परिवर्तन के साथ ही दिन की अवधि बढ़ने लगती है और रातें छोटी होने लगती हैं।
यही कारण है कि माघ मास को शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय माना गया है। इसी महीने ऋतुओं के राजा वसंत ऋतु का आगमन होता है। दिन में खिलखिलाती धूप लोगों को न केवल ठंड से राहत देती है, बल्कि शरीर और मन को भी स्फूर्ति से भर देती है।
आचार्य पंडित मनोज कुमार चौबे के अनुसार धर्मशास्त्रों में माघ मास को अत्यंत पवित्र बताया गया है। इस दौरान गंगा स्नान, सूर्य उपासना तथा चावल, काला तिल और गुड़ का दान करने से पापों और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि माघ मास आत्म-शुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय है। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना से इस मास में विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है, जिसे मोक्ष का द्वार भी कहा गया है।
माघ मास का वैज्ञानिक महत्व भी कम नहीं है। इस दौरान तिल और गुड़ का सेवन शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार तिल और गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
शाहपुर रेफरल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अतिउल्लाह अंसारी बताते हैं कि माघ की धूप से शरीर को भरपूर विटामिन-डी मिलता है, जिससे ठंड के कारण सिकुड़ी हुई तंत्रिकाएं और ऊतक सामान्य होने लगते हैं और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
प्रकृति पर भी माघ मास का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है। इस महीने सूर्य की किरणों से पेड़-पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
खेतों में फसलें फूलों से लदने लगती हैं और आम के पेड़ों में मंजर आने लगते हैं। तापमान की बात करें तो माघ मास के पूर्वार्ध में दिन का तापमान औसतन 18 से 22 डिग्री सेल्सियस रहता है, जबकि उत्तरार्ध में यह बढ़कर 22 से 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
कुल मिलाकर, माघ मास आस्था, आरोग्य और प्रकृति के संतुलन का अनुपम संगम है, जो मानव जीवन को नई ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। |