महाभारत से जुड़े साक्ष्य
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महर्षि व्यास द्वारा रचित महाभारत संस्कृत वाङ्मय का सबसे बड़ा ग्रंथ है। इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहते हैं, क्योंकि इसमें एक लाख श्लोक समाहित हैं। आज हम आपको भारत के ऐसे स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो महाभारत काल (Mahabharata evidence) की प्रमाणिकता को सिद्धि करते हैं।
यहां हुई थी महाभारत ग्रंथ की रचना
उत्तराखंड के चमोली में वह गुफा मौजूद है, जहां व्यास जी ने भगवान गणेश की मदद से महाभारत ग्रंथ की रचना की थी। जिले के माणा गांव में स्थित है। इस गुफा को व्यास गुफा (Vyas Gufa Chamoli) के नाम से जाना जाता है, जो सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। यहां वेद व्यास जी की मूर्ति भी स्थापित है और इसके पास ही गणेश गुफा भी है।
कुरुक्षेत्र (Kurukshetra)
कुरुक्षेत्र वह स्थान है, जहां कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध लड़ा गया। साथ ही इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश भी दिया था। इसलिए यह स्थान आज भी इतना महत्व रखता है।
श्रीमद्भागवत के पहले श्लोक में कुरुक्षेत्र का वर्णन, धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के रूप में किया गया है। इस स्थान पर कई पुरातत्वीय साक्ष्य (Mahabharata archaeological evidence) भी मिले हैं, जिनमें बाण, भाले, पुराने कुएं, ईंटें आदि शामिल हैं।
कहां स्थित है हस्तिनापुर
महाभारत ग्रंथ में हस्तिनापुर का भी जिक्र मिलता है, जो कुरु वंश की राजधानी था। आज यह स्थान उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है, जहां ऐतिहासिक स्थल (Mahabharata history India) जैसे जंबुद्वीप और कैलाश पर्वत मंदिर मौजूद हैं। पुरातात्विक खुदाई में इस स्थान से महाभारतकालीन साक्ष्य भी मिले हैं, जो इस स्थान को और भी खास बनाते हैं।
द्वारका (Dwarka Nagri)
(AI Generated Image)
द्वारका नगरी भी महाभारत काल से जुड़े ऐसे साक्ष्यों में से एक है जो महाकाव्य की घटनाओं को प्रमाणिकता (ancient Mahabharata sites) देती है। द्वारका भगवान श्रीकृष्ण की राजधानी थी, जो बाद में समुद्र में डूब गई थी।
आधुनिक पुरातत्व विभाग जैसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राष्ट्रीय महासागर संस्थान (NIO) ने गुजरात के पास समुद्र के नीचे एक ऐसा शहर खोजा है, जिसके लेकर यह कहा गया है कि वह महाभारत काल की द्वारका नगरी ही है। यह स्थान गुजरात के आधुनिक द्वारका शहर के पास अरब सागर में स्थित है।
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