LHC0088 • 1 hour(s) ago • views 800
इंटरसेप्टर वाहन
जागरण संवाददाता, बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का सफर सुरक्षित व सुगम बनाने की कवायद में यूपीडा प्रत्येक 25 किलोमीटर पर सुरक्षा बूथ स्थापित करने की योजना तैयार की है। इसमें प्रत्येक बूथ पर एक सहायक सुरक्षा अधिकारी व चार अन्य सुरक्षा कर्मी तैनात होंगे।
बूथों पर तैनात पांच सदस्यीय टीम इंटरसेप्टर वाहन से लैस होगी। जो वाहनों की तेज गति, मेंटीनेंस, ड्रिंकिंग आदि सड़क नियमों के उल्लंघन की दशा में कार्रवाई आदि के साथ एक्सप्रेस-वे में होने वाली दुर्घटनाओं में तत्काल मौके पर पहुंच कर मददगार बनेंगी।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का जिले में 65 किलोमीटर का क्षेत्र आता है। इसमें चार प्रवेश स्थल यानी इंट्री प्वाइंट हैं। प्रवेश स्थलों में किलोमीटर 23 में बिसंडा के पास, किलोमीटर 43 हथौड़ा के पास, किलोमीटर 50 महोखर के पास व किलोमीटर 55 मवई के पास स्थित है।
यहां से होकर प्रतिदिन करीब दो से तीन हजार वाहन आवागमन करते हैं। सर्दी के समय में कोहरे के कारण व मथुरा एक्सप्रेस-वे में हुए हादसे के बाद यूपीडा लगातार सुरक्षित आवागमन की कवायद कर रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर जल्द ही प्रत्येक 25 किलोमीटर पर एक सुरक्षा चौकी स्थापित की जानी है।
इसमें एक सहायक सुरक्षा अधिकारी के साथ चार अन्य कर्मी तैनात रहेंगे। इनके पास एक इंटरसेप्टर वाहन भी उपलब्ध रहेगा। इंटरसेप्टर वाहन से लैस टीम बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर दौड़ रहे वाहनों की निर्धारित गति से अधिक में चलने समेत यातायात के नियमों के उल्लंघन की दशा में चालान आदि की कार्रवाई कर सकेगी।
वहीं प्रत्येक चार बूथों की कार्यप्रणाली आदि पर नजर रखने के लिए प्रत्येक 100 किलोमीटर पर एक मुख्य सुरक्षा अधिकारी की भी तैनाती की जाएगी।
दुर्घटना के समय मददगार बनेगी टीम
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यूपीडा की कवायद में यह टीम मददगार साबित होगी। दुर्घटना के समय एंबुलेंस के साथ पहुंची टीम के सदस्य तत्काल घायलों को एंबुलेंस में बैठाने से लेकर अस्पताल तक भर्ती कराने में मदद करेंगे। यही नहीं एंबुलेंस की देरी पर यह वाहन घायलों को स्वयं अपने वाहन से ले जा सकेंगे। इसके लिए प्रशिक्षित सदस्य तैनात किए जाने की योजना है।
यह भी पढ़ें- कानपुर-अलीगढ़ हाईवे में रैंप और सीढ़ियों के साथ बनेंगे फुटओवर ब्रिज, हादसे को रोकने NHAI की पहल
क्या है इंटरसेप्टर वाहन
इंटरसेप्टर वाहन एक अत्याधुनिक, हाई-टेक गाड़ी होती है, जिसे सड़क सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जो ओवर स्पीडिंग व अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर नज़र रखती है। उनका पता लगाकर चालान करती है, इसके लिए इसमें रडार, हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे, नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर), ब्रेथ एनालाइज़र जैसी तकनीकें लगी होती हैं। ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके और सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
इसमें लेज़र स्पीड गन और रडार लगे होते हैं जो करीब एक किलोमीटर दूर से ही वाहनों की गति माप सकते हैं। नंबर प्लेट पहचान के लिए लगे उच्च-रिज़ाल्यूशन कैमरे के ज़रिए वाहन की नंबर प्लेट को पढ़ सकता है, जिससे उल्लंघन करने वाले की पहचान आसान हो जाती है।
इंटरसेप्टर वाहन में ब्रेथ एनालाइज़र होता है, जिससे शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों का पता लगाया जाता है। साथ ही नियमों का उल्लंघन होने पर तुरंत ई-चालान जेनेरेट किया जा सकता है, जो वाहन मालिक के घर पहुंच जाता है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा बूथ बनाए जाने की योजना है, प्रत्येक 25 किलोमीटर पर बनेंगे। इसमें पांच सदस्यीय टीम इंटरसेप्टर वाहन के साथ तैनात रहेगी। जो नियमों के उल्लंघन के अलावा दुर्घटना के समय मददगार साबित होगी।
विवेक गुप्ता, अधिशाषी अभियंता, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, यूपीडा |
|