भारत में सड़क हादसों पर लगेगी लगाम।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। भारत में सड़क हादसे बड़ी समस्या बन गई है। हर साल लाखों लोग सड़क हादसों में घायल होते हैं। इन हादसों में सालाना हजारों लोगों की जान भी चली जाती है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए सरकार एक नई और मॉडर्न तकनीक लाने करने की तैयारी कर रही है। इस सिस्टम को व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कहा जाता है। इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में संपर्क यानी बात कर सकेंगे। इसके साथ ही यह तकनीक ड्राइवर हादसे से पहले अलर्ट करने का काम करेगी।
क्या है V2V सिस्टम?
V2V यानी व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन एक ऐसी एजवांस टेक्नोलॉजी है। इससे सड़क पर चल रहे वाहन एक-दूसरे से वायरलेस सिग्नल के जरिए जानकारी शेयर करते हैं। इस सिस्टम के तहत हर वाहन में एक छोटी ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगाई जाएगी। यह आसपास चल रहे वाहनों से लगातार डेटा का आदान-प्रदान करेगी।
यह सिस्टम वाहन की स्पीड, लोकेशन, दिशा, ब्रेक की स्थिति और एक्सीलरेशन जैसी जानकारियों को पास के दूसरे वाहनों तक पहुंचाने का काम करेगी। अगर किसी तरह का खतरा सामने होता है, जैसे अचानक ब्रेक लगना, सामने दुर्घटना, कोहरा या ब्लाइंड स्पॉट, तो ड्राइवर को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
V2V सिस्टम पूरी तरह रेडियो सिग्नल पर काम करेगी। इसके लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यह सिस्टम दूरदराज इलाकों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
इसे आप इस तरह से भी समक्ष सकते हैं, हाईवे पर आगे चल रही किसी गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगाया या कोई वाहन सड़क किनारे खड़ा है। ऐसे में पीछे से आ रही गाड़ी को पहले से ही डैशबोर्ड या डिस्प्ले पर चेतावनी मिल जाएगी। इससे ड्राइवर को समय रहते प्रतिक्रिया करने का मौका मिलेगा और टक्कर की संभावना काफी कम हो जाएगी।
यह तकनीक खास तौर पर रियर-एंड क्रैश (पीछे से टक्कर), ब्लाइंड स्पॉट एक्सीडेंट, कोहरे या कम विजिबिलिटी में होने वाले हादसों को रोकने में मददगार साबित हो सकती है।
हादसों में 80 प्रतिशत तक कमी की संभावना
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में करीब 4.80 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.73 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की थी। V2V तकनीक को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि इसके लागू होने से सड़क हादसों में 80 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ड्राइवर को खतरे की जानकारी पहले ही दे देता है, जिससे रिएक्शन टाइम बढ़ जाता है और दुर्घटना टल सकती है।
2030 तक क्या है सरकार का लक्ष्य?
सरकार ने 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है। V2V तकनीक इसी बड़े रोड सेफ्टी मिशन का अहम हिस्सा है। इसके लिए केंद्र सरकार इस परियोजना पर करीब 5000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है।
एक V2V डिवाइस की अनुमानित कीमत 5000 रुपये से 7000 रुपये हो सकती है। शुरुआत में यह सिस्टम नई गाड़ियों में लागू किया जाएगा और बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य वाहनों तक बढ़ाया जाएगा।
2026 तक जरूरी हो सकता है V2V सिस्टम
सरकार की योजना है कि 2026 के अंत तक V2V सिस्टम को आधिकारिक तौर पर तकनीकी मानकों में शामिल कर लिया जाए। इसके बाद नई गाड़ियों में इस सिस्टम को अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि शुरुआत से ही सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
पुरानी गाड़ियों के लिए रेट्रोफिटिंग विकल्प भी दिया जा सकता है, जिससे मौजूदा वाहन भी इस तकनीक का लाभ उठा सकें। वाहन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इसके मानक तय किए जा रहे हैं, ताकि सभी गाड़ियां एक समान और सुरक्षित तरीके से संवाद कर सकें।
ADAS से भी ज्यादा एडवांस
V2V तकनीक मौजूदा ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) को और ज्यादा मजबूत बनाएगी। जहां ADAS केवल कैमरा और सेंसर पर निर्भर करता है, वहीं V2V सिस्टम गाड़ियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करता है। इससे खतरे की पहचान और भी पहले हो जाती है।
यह भी पढ़ें- दुनिया के वो देश जहां बड़ी मुश्किल से बनता है ड्राइविंग लाइसेंस, यहां देखें लिस्ट |
|