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Union Budget 2026: कच्चे तेल पर लगता है OID टैक्स, पेट्रोलियम उद्योग ने सरकार से बजट में की हटाने की मांग

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Union Budget 2026: कच्चे तेल पर लगता है OID टैक्स, पेट्रोलियम उद्योग ने सरकार से बजट में की हटाने की मांग



नई दिल्ली। Union Budget 2026: बजट की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे अलग-अलग उद्योग सरकार से अपनी-अपनी मांगों को दोहरा रहे हैं। तेल एवं गैस उद्योग ने वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में कच्चे तेल पर लगने वाले \“तेल उद्योग विकास\“ (Oil Industry Development) टैक्स को समाप्त करने या इसकी समीक्षा करने की मांग की है।

तेल एवं गैस उद्योग का कहना है OID Tax का घरेलू उत्पादन और परियोजनाओं की व्यवहार्यता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
Petroleum Industry Federation ने वित्त मंत्रालय से की बड़ी मांग

भारतीय पेट्रोलियम उद्योग महासंघ (Indian Petroleum Industry Federation) ने वित्त मंत्रालय को बजट के बारे में भेजे गए अपने सुझाव में कहा है कि OID Tax अब पेट्रोलियम उद्योग के लिए अत्यधिक बोझ बन गया है।

भारतीय पेट्रोलियम उद्योग महासंघ ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से यह उपकर कच्चे तेल की कीमत का केवल 8-10 प्रतिशत रहा है। तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 के तहत लगाए जाने वाले OID टैक्स को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद एक मार्च, 2016 से विशिष्ट दर के बजाय 20 प्रतिशत मूल्य-आधारित शुल्क में बदल दिया गया था।

यह उपकर केवल उन्हीं तेल ब्लॉक पर लागू होता है जिनमें खोज एवं उत्पादन का अधिकार सरकार पहले ही नामित कंपनियों को दे चुकी थी या जो 1997 से पहले की पुरानी लाइसेंसिंग नीति (प्री-एनईएलपी) के तहत आए हैं।

FIPI ने कहा कि असल में ये ब्लॉक अधिकांशतः पुराने और उत्पादन में गिरावट की स्थिति वाले हैं लिहाजा इनमें उत्पादन बनाए रखने के लिए अधिक निवेश की जरूरत होती है। इसके उलट, नवीन खोज लाइसेंस नीति (एनईएलपी), मुक्त क्षेत्र लाइसेंस नीति (Free zone licensing policy) और खोजे गए छोटे क्षेत्र (Small areas were discovered) ब्लॉकों पर यह उपकर लागू नहीं है।

उद्योग निकाय ने कहा है कि मुंबई हाई और बेसिन जैसे ONGC के बड़े क्षेत्र नामित ब्लॉक हैं, जबकि वेदांता केयर्न का राजस्थान क्षेत्र एनईएलपी-पूर्व ब्लॉक है।
संगठन बोला टैक्स से होता है नुकसान

संगठन ने यह भी कहा कि ओआईडी उपकर केवल घरेलू कच्चे तेल पर लगने से स्थानीय उत्पादक आयातित तेल की तुलना में नुकसान में रहते हैं और यह \“मेक इन इंडिया\“ तथा \“आत्मनिर्भर भारत\“ के उद्देश्यों के विपरीत है। उद्योग निकाय ने इस उपकर को पूरी तरह खत्म करने की जगह कच्चे तेल की कीमत से जुड़ा चरणबद्ध उपकर लागू करने का सुझाव दिया है।

इसके तहत 25 डॉलर प्रति बैरल तक शून्य टैक्स, 25-50 डॉलर पर पांच प्रतिशत, 50-70 डॉलर पर 10 प्रतिशत और 70 डॉलर से 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, FIPI ने घरेलू कच्चे तेल पर लगने वाले \“राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क\“ (एनसीसीडी) और \“बुनियादी उत्पाद शुल्क\“ को भी हटाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इन करों को हटाने से नियामकीय बोझ कम होगा और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।

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