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CBSE 12वीं गणित के मॉडल पेपर की आंसर की और विशेषज्ञ टीचर के महत्वपूर्ण सुझाव

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प्रतीकात्मक फोटो  



जागरण संवाददाता, मेरठ। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा में कक्षा 12वीं गणित की परीक्षा नौ मार्च को होगी। यह पेपर पीसीएम के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होता है। बोर्ड परीक्षार्थियों के अभ्यास के लिए केएल इंटरनेशनल स्कूल के पीजीटी गणित अमित गोयल जरूरी सुझाव दे रहे हैं।

  

अमित गोयल के अनुसार गणित की बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए अंतिम दिनों की तैयारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान घबराहट या नए विषय पढ़ने के बजाय पहले से पढ़े हुए पाठ्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से दोहराना ही सबसे प्रभावी रणनीति होती है। परीक्षार्थियों को सबसे पहले पिछले लगभग दस वर्षों के प्रश्नपत्रों का पुनरावलोकन अवश्य करना चाहिए। इससे बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों, महत्वपूर्ण अध्यायों और प्रश्नों के पैटर्न को समझने में मदद मिलती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि किन टापिक्स से सीधे और स्कोरिंग प्रश्न पूछे जाते हैं।

यह भी पढ़ें- CBSE कक्षा 12 गणित का मॉडल पेपर, 9 मार्च को है यह परीक्षा  
यहां से डाउनलोड करें सीबीएसई कक्षा 12वीं गणित के मॉडल पेपर की आंसर की   answer Key.pdf

अमित गोयल के अनुसार गणित में सूत्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सभी आवश्यक और महत्वपूर्ण सूत्रों को एक या दो बार ध्यानपूर्वक देख लेना चाहिए, ताकि परीक्षा के समय किसी भी प्रकार की भूल न हो। सूत्रों की स्पष्ट याददाश्त आत्मविश्वास बढ़ाती है और समय की बचत भी करती है। इंटीग्रेशन से जुड़े प्रश्नों में सबसे पहले यह पहचानना जरूरी होता है कि कौन-सी विधि अपनानी है।

प्रश्न देखकर यह तय करना चाहिए कि समाधान सब्स्टीट्यूशन विधि से होगा, बाई पार्ट्स से या पार्सियल फ्रैक्शंस से। विशेष रूप से डेफिनिट इंटीग्रल्स में सीमाओं (लिमिट्स) के प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिए। डिफरेंशियल इक्वेशंस के प्रश्न हल करते समय सर्वप्रथम समीकरण का आर्डर और डिग्री पहचानना आवश्यक है। इसके बाद यह जांचना चाहिए कि समीकरण वैरिएबल सेपरेबल है, होमोजेनस है या लीनियर डिफरेंसियल इक्वेशन है। सही विधि के चयन से प्रश्न सरल हो जाता है और अनावश्यक गलती से बचा जा सकता है।

वेक्टर और थ्री-डी ज्यामिति में डाट प्रोडक्ट और क्रास प्रोडक्ट पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए। साथ ही रेखा के समीकरण को वेक्टर फार्म और कार्टिसन फार्म-दोनों रूपों में लिखने और समझने का अभ्यास होना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में किसी भी रूप में प्रश्न आ सकता है।
प्रायिकता यानी प्रोबेबिलिटी के प्रश्नों में घटनाओं (इवेंट्स) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना बहुत जरूरी है। कंडीशनल प्रोबेबिलिटी को सही ढंग से समझकर लिखना चाहिए और बेयर्स थ्योरम के प्रयोग में हर चरण को क्रमवार प्रस्तुत करना चाहिए। साफ और तार्किक समाधान अच्छे अंक दिलाता है।

वहीं रेखीय प्रोग्रामन (लीनियर प्रोग्रामिंग) में कंस्ट्रेंट्स और आब्जेक्टिव फंक्शन को सही तरीके से फार्मुलेट करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद फीजिबल रीजन का सही निर्धारण कर कार्नर प्वाइंट्स निकालकर समाधान करना चाहिए।
उत्तर लिखते समय केवल अंतिम उत्तर पर ध्यान न देकर पूरी विधि और सभी आवश्यक स्टेप्स अवश्य लिखें, क्योंकि बोर्ड परीक्षा में मेथड के लिए अंक निर्धारित होते हैं। डायग्राम वाले प्रश्नों और प्रायिकता से जुड़े प्रश्नों को शांत मन से हल करें और तर्क स्पष्ट रखें। परीक्षा से पहले समय पर सोना बेहद जरूरी है।
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