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यूपी के इस छोटे जिले पर पड़ा ट्रंप की धमकियों का बड़ा असर, नए विकल्प तलाश रहे निर्यातक

LHC0088 2026-1-16 11:56:36 views 933
  



अमेरिका में 400 करोड़ का होता था निर्यात, अब घटकर रह गया आधा


जागरण संवाददाता, रामपुर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों टैरिफ को लेकर आए दिन नई-नई धमकियां दे रहे हैं। पहले 50 फीसदी का टैरिफ लगाया, फिर रूस से तेल खरीदने के नाम पर 25 फीसदी की पैनाल्टी लगाई।

पिछले दिनों भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी भी दे डाली और उससे भी बात नहीं बनी तो ईरान के साथ ट्रेड करने पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे दी। जिले से अमेरिका में सबसे अधिक निर्यात मेंथा तेल व उससे बने उत्पादों का होता है।

इसके अलावा स्पेन, ब्रिटेन, कोरिया, ताइवान आदि देशों में भी निर्यात होता है, लेकिन सबसे अधिक करीब 400 करोड़ का मेंथा का निर्यात अमेरिका को किया जाता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद निर्यात आधा रह गया है।

डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार टैरिफ बढ़ाए जाने की धमकी के बाद निर्यातक नए विकल्प तलाश रहे हैं। अमेरिका के अलावा अन्य देशों में माल बेचने के लिए बायर की तलाश की जा रही है।

निर्यातकों की बात


जिले से प्रत्येक वर्ष करीब 400 करोड़ का मेंथा आयल उत्पादों का अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिका ने चार माह पहले 50 फीसद टैरिफ लगा दिया था। अब फिर बार-बार अमेरिका से टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी जा रही हैं। ऐसे में निर्यातक यूरोप, मध्य पूर्व और एशियाई देशों के साथ कारोबार के लिए प्रयास कर रहे हैं।

-विपिन गुप्ता, मेंथा निर्यातक एवं मंडल सचिव लघु उद्योग भारती।

अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने का प्राकृतिक मेंथोल पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है, क्योंकि सिर्फ भारत ही इसका मुख्य स्र्रोत है। यहां खेतों में मेंथा की फसल तैयार होती है और उसके बाद तेल निकाला जाता है, जबकि चाइना व अन्य देश सिंथेटिक मेंथोल बनाकर बेच रहे हैं।

-रमेश अग्रवाल, मेंथा निर्यातक।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चार माह पहले टैरिफ बढ़ाने के बाद से अमेरिका के बाजार में यहां से निर्यात होने वाले मेंथोल की डिमांड कम हुई है, जिसके बाद निर्यातक दूसरे देशों जैसे रूस, तुर्की आदि में बायर तलाश कर रहे हैं।

-अमृत कपूर, मेंथा निर्यातक।

अमेरिका के नए टैरिफ के बाद मेंथा का निर्यात करीब 50 फीसद कम हो गया है। इंडस्ट्री बहुत कोशिश कर रही है, लेकिन नए खरीदार मिलना आसान नहीं है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में कस्टमर मिल रहे हैं, लेकिन सामान इस्तेमाल करने के लिए यूएस एक बहुत ज़रूरी देश है।

-संचित गुप्ता, अध्यक्ष मेंथा एसोसिएशन रामपुर।
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