बिहार का परचम लहराने उतरेगा ‘नालंदा सूरज’
राजीव प्रसाद सिंह, एकंगरसराय(नालंदा)। एकंगरसराय पैक्स अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह केवल स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि घुड़सवारी की दुनिया में एक सशक्त और सम्मानित नाम हैं। राज्य से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों तक उनकी पहचान एक अनुभवी घुड़सवार, प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में रही है। युवावस्था से ही घोड़ों के प्रति उनका जुनून उन्हें इस मुकाम तक ले आया कि लोग स्नेह और सम्मान से उन्हें ‘घोड़ा सिंह’ कहकर पुकारते हैं।
घुड़सवारी की दुनिया में लंबा और गौरवशाली सफर
स्वर्गीय विवेका पहलवान के दौर से लेकर वर्तमान विधायक अनंत सिंह के समय तक, बिहार के घोड़ा प्रेमियों के बीच अरुण सिंह का नाम विशेष आदर के साथ लिया जाता रहा है।
उन्होंने बिहार समेत कई राज्यों में सैकड़ों घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग लिया और अनेक बार जीत दर्ज कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी पहचान केवल विजेता के रूप में नहीं, बल्कि घुड़सवारी की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तित्व के रूप में भी रही है।
अनुभव और ज्ञान के कायल रहे बड़े नेता
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्वर्गीय रमई राम भी घोड़ों के बड़े शौकीन थे। उनके अस्तबल में उम्दा नस्ल के कई घोड़े हुआ करते थे।
बताया जाता है कि वे कई बार अरुण सिंह को अपने आवास पर बुलाकर घोड़ों के प्रशिक्षण, देखभाल और घुड़सवारी से जुड़ी बारीकियों पर चर्चा करते थे। यह अरुण सिंह की विशेषज्ञता और प्रतिष्ठा का प्रमाण माना जाता है।
अब मैदान में नहीं, मार्गदर्शन में चमक रहा नाम
उम्र के बढ़ते प्रभाव के कारण अरुण सिंह अब स्वयं घुड़दौड़ में हिस्सा नहीं लेते, लेकिन घुड़सवारी से उनका लगाव आज भी उतना ही गहरा है। उन्होंने हंसराज नामक घुड़सवार को विशेष रूप से प्रशिक्षित कर रखा है, जो विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके घोड़े को मैदान में उतारते हैं।
‘नालंदा सूरज’ ने लगातार जीते दिल और पुरस्कार
अरुण सिंह के मार्गदर्शन में घोड़ा ‘नालंदा सूरज’ लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है। हाल के दिनों में इस घोड़े ने मोकामा के परशुराम स्थान में द्वितीय, जहानाबाद के डैडी में प्रथम, भोजपुर के करिस्था में द्वितीय, उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में प्रथम, बक्सर के डुमरी में द्वितीय और पूर्वी चंपारण के इंग्लिश पहाड़पुर में प्रथम स्थान हासिल कर अपनी क्षमता साबित की है।
कच्छ के रण में होगी अग्निपरीक्षा
घुड़दौड़ के प्रति अरुण सिंह का जुनून इस कदर है कि वे लाभ-हानि की परवाह किए बिना देश के कोने-कोने में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
18 जनवरी को गुजरात के कच्छ जिले के बेकरी रण में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित घुड़दौड़ प्रतियोगिता के लिए उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर ट्रक के माध्यम से ‘नालंदा सूरज’ को गुजरात भेजा है, जबकि स्वयं सहयोगियों के साथ कार से वहां पहुंचे हैं।
परंपरा और सम्मान का प्रतीक है घुड़दौड़
अरुण सिंह का मानना है कि घुड़दौड़ केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि परंपरा, सम्मान और जुनून का प्रतीक है। उनके मार्गदर्शन में तेल्हाड़ा में पूर्व विधायक बैजू यादव की अगुवाई में दशकों से घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होता आ रहा है, जिससे क्षेत्र में यह परंपरा आज भी जीवंत बनी हुई है।
अब एकंगरसराय, नालंदा और पूरे बिहार की निगाहें 18 जनवरी को कच्छ में होने वाली इस दौड़ पर टिकी हैं, जहां ‘नालंदा सूरज’ से एक बार फिर राज्य का नाम रोशन करने की उम्मीद की जा रही है। |