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पानीपत एक्सप्रेस-वे का बन रहा नक्शा, फिर तय होगा आगे का रास्ता, 750 KM लंबे Expressway के लिए टीम कर रही सर्वे

LHC0088 4 hour(s) ago views 903
  



सुधीर सिंह, पीपीगंज। पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए अभी रास्ते का सर्वे हो रहा है। सर्वे के बाद नक्शा बनेगा। इस नक्शा को राजमार्ग मंत्रालय में भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद बजट की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद निर्माण कार्य का काम शुरू होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारी इस पर तेजी से काम कर रहे हैं। बजट मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर काम होगा।

पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेस को कुशीनगर तक बढ़ा दिया गया है। 750 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए विशेषज्ञों की टीम सर्वे कर रही है। एलाइमेंट सर्वे के बाद पत्थर लगाने का काम पीपीगंज क्षेत्र में पूरा हो गया है। अब लेवल सर्वे का काम चल रहा है। पीपीगंज के नयनसर टोल प्लाजा के करीब से गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राज्यमार्ग को यह एक्सप्रेसवे पार करेगा। एनएचएआइ की ओर से लगाए गए पिलरों को रंग कर जियो टैगिंग कराई जा रही है। कुशीनगर-पानीपत एक्सप्रेस वे की लंबाई संतकबीरनगर में 22.50 किमी, गोरखपुर में 34 किमी और कुशीनगर में तीन किमी होगी।


नगर क्षेत्र में चार गुना, ग्रामीण में दो गुना कीमत
पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण और दाम को लेकर किसानों में ऊहापोह है। भईयाराम के किसान प्रदीप चौरसिया, संजय सिंह ने कहा कि वर्ष 2016 के बाद सर्किल रेट बढ़ा नहीं है। हकीकत यह है कि भूमि की कीमत सर्किल रेट के दस गुना से अधिक हो चुकी है। भैयाराम तिघरा निवासी गोविंद शरण पाठक कहते हैं कि, जिनकी भूमि एक्सप्रेसवे में 40 एयर से कम है उनको आवासीय दर से मुआवजा मिलना चाहिए। रमवापुर के गौरीशंकर यादव कहते हैं कि मेरा घर व जमीन एक्सप्रेसवे में जा रही है, स्कूल के सामने पिलर लगाया गया है। देखिए कितना मुआवजा मिलता है।

भरोहिया विकास खंड की प्रधान सुमन त्रिपाठी ने कहा कि पानीपत एक्सप्रेसवे बनने से विकास और तेज होगा। एसडीएम कैंपियरगंज सिद्धार्थ पाठक ने कहा कि पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए एलाइनमेंट किया गया है। अभी गजट नहीं हुआ है। गजट होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। वैसे पहले से तय है कि नगरीय क्षेत्र में सर्किल रेट का दो गुणा और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुणा तक मुआवजा दिया जाता है।

इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे को कुशीनगर में सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। पहले यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शामली तक बनना था। बाद में इसे हरियाणा के पानीपत तक बनाने का निर्णय लिया गया। फिर इसे कुशीनगर की सीमा में सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जोड़ने का निर्णय लिया गया। यह एक्सप्रेसवे, कुशीनगर से गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, पानीपत तक बनेगा।

पेड़ कम कटेंगे
पानीपत एक्सप्रेसवे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा। यानी पेड़ कम से कम काटने पड़ें इस पर काम चल रहा है। सर्वे में भी एलाइनमेंट का पूरा ध्यान रखते हुए कम से कम पेड़ काटने पर जोर दिया जा रहा है।



पानीपत-कुशीनगर एक्सप्रेसवे के लिए एलाइनमेंट का काम पूरा कराया जा रहा है। इसके बाद नक्शा बनाया जाएगा और इसे मंत्रालय में भेजा जाएगा। फिर आगे की प्रक्रिया चलेगी। - ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ

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