राज्य ब्यूरो, लखनऊ। निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत सत्र 2026–27 में कक्षा एक और पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में दाखिले होने हैं। बीते वर्ष दिसंबर में ही आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, जबकि इस बार जनवरी के अंत तक आवेदन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। देरी के कारण समय-सारिणी सिमट गई है और विभाग को सीमित समय में आवेदन, लाटरी, सत्यापन और प्रवेश की पूरी प्रक्रिया करानी होगी।
पिछले सत्र में आरटीई के तहत करीब 1.85 लाख बच्चों ने आवेदन किया था, जिनमें से 1.41 लाख बच्चों को विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश मिला था। इस बार प्रदेश के लगभग 68 हजार विद्यालयों को आरटीई पोर्टल पर मैप किया गया है। इन विद्यालयों में कुल स्वीकृत सीटों के 25 प्रतिशत पर अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। आवेदन प्रक्रिया में अभिभावकों को अपने आसपास स्थित अधिकतम 10 विद्यालयों का विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी।
लॉटरी के जरिये सीटों का होगा आवंटन
विद्यालयों का चयन जिस क्रम में किया जाएगा, उसी प्राथमिकता के आधार पर लाटरी के जरिये सीट आवंटन होगा। आवेदन केवल उसी क्षेत्र के विद्यालयों में मान्य होगा, जहां विद्यालय स्थित है। इसमें ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम के वार्ड शामिल किए गए हैं। यानी अभिभावक अपने वार्ड या पंचायत क्षेत्र से बाहर के विद्यालयों में आवेदन नहीं कर सकेंगे। एक चरण में अभिभावक केवल एक बार ही आवेदन कर पाएंगे।
यदि पहले चरण में किसी विद्यालय में सीट आवंटित नहीं होती है, तो अगले चरण में फिर से आवेदन करने का अवसर मिलेगा। प्रवेश के लिए बच्चे की आयु की गणना एक अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी। इसके अनुसार नर्सरी में प्रवेश के लिए आयु तीन से चार वर्ष, एलकेजी के लिए चार से पांच वर्ष, यूकेजी के लिए पांच से छह वर्ष और कक्षा एक के लिए छह से सात वर्ष निर्धारित की गई है।
आवेदन प्रक्रिया शुरू होने में हो रही देरी के चलते अब विभाग के सामने यह सुनिश्चित करना बड़ी जिम्मेदारी होगी कि सीमित समय में सभी चरण पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकें, ताकि सत्र आरंभ होने से पहले बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश मिल सके। |