पुलिस के सामने हाथ जोड़ती महिला
संवादसूत्र, जागरण, इस्लामनगर। थाना क्षेत्र के गांव ब्योर कासिमाबाद में शुक्रवार सुबह एक ओर श्रद्धालु और दूसरी ओर पुलिस मुस्तैद खड़ी थी। दोनों ओर से मोबाइलों के कैमरे चालू थे। जहां पुलिस उन्हें हाथ जोड़कर पीछे हटाने का प्रयास कर रही थी तो वहीं श्रद्धालु भी हाथ जोड़कर आगे जाने को कह रहे थे।
श्रद्धालुओं का कहना है कि इसी दौरान पुलिस ने उन्हें धमकी दी कि वह पीछे लौट जाएं, नहीं तो लाठीचार्ज किया जाएगा। इसी बात से श्रद्धालु भड़क गए और वहीं डटकर खड़े हो गए। वह जय श्रीराम के नारे भी लगा रहे थे। आरोप है कि तभी कुछ पुलिसकर्मियों ने पीछे से आकर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई और बाद में कई लोग इधर-उधर घायल पड़े दिखाई दिए।
ब्योर कासिमाबाद गांव में हुए बवाल की कई वीडियो प्रसारित हुई हैं। जो पुलिस की ओर से वीडियो सामने आए हैं, उनमें इंस्पेक्टर नरेश कुमार सिंह और सीओ श्रद्धालुओं के आमने-सामने खड़े हैं। दो वीडियो में इंस्पेक्टर हाथ जोड़ते और पैर छूते दिखाई दे रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर कई श्रद्धालु भी हाथ जोड़े खड़े दिखाई दे रहे हैं।
उनमें शामिल महिलाएं भी हाथ जोड़कर पुलिस से विनती कर रही हैं लेकिन पुलिस उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। जो वीडियो श्रद्धालुओं की ओर से प्रसारित किए गए हैं। उनमें कुछ पुलिसकर्मी साइड से आकर डंडा चलाते दिखाई दे रहे हैं। फिर श्रद्धालु अपनी जान बचाकर भागते नजर आए। कुछ श्रद्धालुओं कहना है कि आगे से इंस्पेक्टर और सीओ ने निर्देश दिए थे। तब उनके ऊपर हमला किया गया।
जब बाद में देखा तो कई लोग इधर-उधर घायल अवस्था में पड़े थे। किसी के खून निकल रहा था तो कोई लड़खड़ाते हुए भाग रहा था। यह दृश्य काफी डरावना था। हालांकि इसके बावजूद श्रद्धालु अपनी मांग पर अड़े रहे। जब काफी बवाल हो गया तो पुलिस को ही उनके आगे झुकना पड़ा। बाद में फिर प्रभात फेरी भी निकलवाई गई और वह जिस रास्ते से जाना चाहते थे, उसी रास्ते से निकलवाया गया।
श्रद्धालु बोले- हमने जमीन देकर बनवाई मस्जिद, तो किसने की शिकायत
इस बवाल को लेकर श्रद्धालुओं का एक सवाल है कि आखिर उनके ऊपर लाठी क्यों चलाई गई। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके गांव में आपसी सामंजस्य बना हुआ है। जब उनके गांव में मस्जिद नहीं थी, तब उन्होंने खुद जमीन देकर मस्जिद का निर्माण कराया था। दूसरे समुदाय के लोग उनके धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते।
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रभात फेरी लोगों के घरों से होते हुए निकाली जाती रही है। कई वर्षों से क्रम चला आ रहा है। पहली बार पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इसमें खुराफात से इन्कार नहीं किया जा सकता। अगर किसी ने खुराफात की है तो उसका चेहरा भी सामने आना चाहिए और उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
बिना महिला पुलिस के गांव पहुंच गई टीम
श्रद्धालुओं को रोकने के लिए जो पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। उनमें एक भी महिला पुलिसकर्मी दिखाई नहीं दे रही है और जो पुलिस की ओर से वीडियो प्रसारित हुए हैं, उनमें भी कोई महिला पुलिसकर्मी नजर नहीं आ रही है। श्रद्धालुओं का आरोप है कि पुलिस टीम ने महिलाओं के ऊपर भी डांडा फटकारा, जिससे कई महिलाएं घायल हो गईं। पुलिस ने अपनी ताकत का गलत फायदा उठाया है।
इंस्पेक्टर बोले- मैंने नहीं चलवाई लाठी
इस घटना को लेकर इंस्पेक्टर नरेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने लाठी नहीं चलवाई। वह तो श्रद्धालुओं के हाथ पैर जोड़ रहे थे और उन्हें पीछे लौटने को कह रहे थे। वह वीडियो में हाथ जोड़ते साफ दिखाई दे रहे हैं।
यह भी पढ़ें- UP News: बदायूं में प्रभात फेरी के रास्ते पर भारी हंगामा, धरने पर बैठे लोग तो पुलिस ने चटकाई लाठियां |
|