जल संकट से मुक्ति की ओर पंजाब का ऐतिहासिक कदम
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की महत्वाकांक्षी मालवा नहर परियोजना को पंजाब के सिंचाई इतिहास का सबसे बड़ा और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। 2,300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह नहर लगभग 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराएगी और भूजल पर निर्भरता को कम करेगी।
यह 149 किलोमीटर लंबी नहर, आज़ादी के बाद पंजाब की पहली नई नहर परियोजना है। यह सतलुज नदी के हरिके हेडवर्क्स से शुरू होकर राजस्थान और सिरहिंद फीडर के समानांतर बहते हुए मुक्तसर जिले में हरियाणा सीमा तक पहुंचेगी। इसकी जल वहन क्षमता 2,000 क्यूसेक तय की गई है।
फिलहाल परियोजना भूमि अधिग्रहण चरण में है। मुक्तसर जिले के 22 गांवों में लगभग 822 एकड़ भूमि के लिए अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं। प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और सेवानिवृत्त तहसीलदार की नियुक्ति की गई है।हरिके में हेडवर्क्स निर्माण के लिए 27 करोड़ रुपये के टेंडर लगभग अंतिम चरण में हैं और निर्माण कार्य 2026 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है। भूमि के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) रिपोर्ट को सरकार ने मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री मान का कहना है कि यह परियोजना केवल नहर नहीं, बल्कि मालवा क्षेत्र के लिए जीवनरेखा साबित होगी, जिससे खेती टिकाऊ बनेगी और पंजाब जल-सुरक्षा की दिशा में आत्मनिर्भर होगा। |
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