जागरण संवाददाता, लखनऊ। ईरान से भारत आने वाला खीमिया व बाम नाम का खजूर पूरी तरह से बंद हो गया है। लखनऊ व कानपुर में खीमिया व बाम खजूर की खपत सबसे अधिक होती है। पिछले कई सप्ताह से इसकी आवक पूरी तरह से बंद हो गई है। ऐसे में यह खजूर थोक बाजार में पचास से सत्तर रुपये प्रति किलो बढ़ गया है।
वहीं फुटकर में सौ रुपये प्रति किलो असर आया है। इसके अलावा सेब, कीवी, प्लम व नाशपाति भी नहीं आ पा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि ईरान से आने वाले माल के न आने से कीमतों में इजाफा होना तय है। वहीं जो माल आ रहा है वह ओमान के रास्ते आ रहा है। इससे कीमत बढ़ना तय है। वहीं 18 फरवरी से रमजान शुरू हो रहे हैं, ऐसे में अगर तनाव लंबा चला तो फलों के दाम इस बार बढ़ने तय है।
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुसफ रजा जैदी ने बताया कि भारत में अमूमन अस्सी कंटेनर खजूर की खपत होती है। लखनऊ व कानपुर जिलों में तीन से चार कंटेनर प्रति सप्ताह खपत है। वहीं इन दोनों जिलों में आने वाला खीमिया सी व डी ग्रेड का होता है। इसे ही यहां खाया जाता है। उनके मुताबिक अभी फुटकर में इसके रेट साढ़े चार सौ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
मुंबई के बंदरगाहों से खजूर के कंटेनर आते हैं और फिर यहां अलग-अलग राज्यों को जाते हैं। राजधानी के व्यापारी तनवीर के कहते हैं कि फलों की कीमत एक सप्ताह में और बढ़ेंगी, क्योंकि अभी बंदरगाहों के आसपास स्थित गोदामों में माल काफी है। वहीं चल रहा है। पीछे से माल आना बंद होगा तो असर पड़ेगा। तनवीर भी बासमती चावल, नारियल और केला ईरान को भेजते थे। इधर तनाव बढ़ने से व्यापार कई सप्ताह से बंद है। |