फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में दो बच्चों के फेफड़ों से मूंगफली सफलतापूर्वक निकाली गई। एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। अमृता अस्पताल में छोटे बच्चों के दो मामले सामने आए, दोनों के फेफड़ों में मूंगफली फंसी हुई थी, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। डॉक्टरों ने सर्जरी करके मूंगफली निकाली और बच्चों को नई ज़िंदगी दी। समय पर इलाज के कारण बच्चे अब पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि स्थिति गंभीर हो सकती थी।
पूरी रात डॉक्टरों की निगरानी में...
डॉक्टरों के मुताबिक, एक सवा साल का बच्चा और दूसरा आठ महीने का बच्चा एक हफ्ते से लगातार खांसी और सांस लेने में दिक्कत से परेशान थे। दोनों बच्चों के परिवारों ने पास के अस्पताल में इलाज करवाया, लेकिन उनकी हालत और बिगड़ गई। जब बच्चे अमृता अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी, और जांच में पता चला कि उनका ऑक्सीजन लेवल सिर्फ 40 प्रतिशत था। बच्चों को पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में भर्ती किया गया। वे पूरी रात डॉक्टरों की निगरानी में रहे।
बच्चे के फेफड़े में फंसा मूंगफली का दाना, जिसे डाक्टरों की टीम ने सर्जरी कर निकाला। सौ.पीआरओ अस्पताल
फेफड़े में फंसा था मूंगफली का दाना
अस्पताल में रेस्पिरेटरी मेडिसिन (पल्मोनरी मेडिसिन) के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ पाहुजा ने बताया कि अगली सुबह पूरी जांच में पता चला कि एक बच्चे के दाहिने मुख्य एयरवे में मूंगफली पूरी तरह से फंसी हुई थी, जिससे फेफड़े में हवा की सप्लाई रुक गई थी। बच्चे के फेफड़ों को हवा नहीं मिल रही थी।
अगर इसे निकालने में और देरी होती, तो बच्चे के फेफड़े खराब हो सकते थे। ऑक्सीजन की कमी जानलेवा भी हो सकती थी। मूंगफली निकालने के लिए सर्जरी की गई। कुछ ही घंटों में बच्चे का ऑक्सीजन लेवल बेहतर हो गया, और उसे अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
ऑक्सीजन लेवल सिर्फ 40 प्रतिशत
उसी दिन एक और ऐसा ही मामला सामने आया। इस मामले में, आठ महीने के बच्चे का भी ऑक्सीजन लेवल सिर्फ 40 प्रतिशत था। बच्चे के परिवार ने बताया कि उनका बच्चा करीब 10 दिनों से बीमार था और दूसरे अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। जांच में पता चला कि बच्चे के बाएं फेफड़े में कुछ फंसा हुआ था। डॉ. सौरभ पाहुजा के अनुसार, बच्चे के एयरवे का छोटा आकार होने के कारण स्थिति जटिल थी।
मेडिकल टीम ने फंसी हुई चीज को निकालने के लिए एडवांस्ड फ्रीजिंग (क्रायोथेरेपी) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। पता चला कि वह भी एक मूंगफली थी। वह कई दिनों से एयरवे के अंदर थी और नमी के कारण फूल गई थी। बच्चे को तीन दिनों तक गहन निगरानी में रखा गया और बाद में उसे छुट्टी दे दी गई।
हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के हेड कंसल्टेंट डॉ. मनिंदर सिंह धालीवाल ने कहा कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर किसी बच्चे को एक दिन से ज्यादा समय तक खांसी, सांस लेने में घरघराहट और सांस लेने में दिक्कत होती है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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