वर्ष 2019 से 2023 तक चंडीगढ़ से 2649 बच्चे लापता हुए।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में हर वर्ष 500 से अधिक बच्चे लापता हो रहे हैं। वर्ष 2019 से 2023 तक शहर से 2649 बच्चे लापता हुए। गायब होने वाले बच्चों में से 67 प्रतिशत को पुलिस ट्रेस करने में नाकाम रही है।
हर दो में से एक से अधिक बच्चा अब भी लापता है। वहीं, बरामदगी दर मात्र 33 प्रतिशत कम है। शहर से गायब हो रहे बच्चों की स्थिति ने पुलिस और प्रशासन के सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में पेश रिपोर्ट के मुताबिक पांच वर्षों में गुमशुदा बच्चों की बरामदगी को लेकर चंडीगढ़ की स्थिति काफी चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में चंडीगढ़ से 553 बच्चे लापता हुए, लेकिन इनमें से सिर्फ 226 बच्चों को ही पुलिस ढूंढ पाई।
करीब 59 प्रतिशत लापता बच्चों का आज तक कोई पता नहीं चल सका। वर्ष 2019 में 528 बच्चे लापता हुए थे, जिनमें से केवल 172 बच्चों को ही वापस लाया जा सका। वर्ष 2020 में 509 लापता हुए, जिनमें से केवल 172 मिले है।
इसके साथ ही वर्ष 221 में लापता होने वाले बच्चों की संख्या 536 थी, जिनमें से केवल 181 बच्चों की मिले या ट्रेस किए जा सके। वहीं, 2022 में 523 मामलों में सिर्फ 161 बच्चों की बरामदगी हुई।
गुमशुदा बच्चों की बरामदगी में पंजाब-हरियाणा से पिछड़ी राजधानी
महिला और बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के मामले में राजधानी चंडीगढ़ की स्थिति पंजाब-हरियाणा के मुकाबले बेहद कमजोर है। चंडीगढ़ में 2023 में 1064 बच्चों की बरामदगी हुई। वहीं, हरियाणा में 4611 लापता बच्चों में से 2740 बच्चों को खोज निकाला गया, जो चंडीगढ़ से कहीं बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम रिकवरी रेट यह दर्शाता है कि गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए न तो ठोस रणनीति बनाई गई और न ही निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। चंडीगढ़ में हर वर्ष गायब हो रहे 500 से अधिक बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
महिला और बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार
वर्ष लापात बच्चे रिकवरी व ट्रेस
2019 528 172
2020 509 153
2021 536 181
2022 523 161
2023 553 226 |
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