हिमाचल प्रदेश में सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की कैबिनेट ने पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने का निर्णय लिया है।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाने का निर्णय लिया है। हिमाचल सरकार ने बेसहारा बच्चों और विधवा महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा देने के लिए यह कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल (तेल) और हाई स्पीड डीजल पर सेस (सेस) लगाने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है।
सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई, जिसके बाद अब कर एवं आबकारी विभाग की ओर से अध्यादेश जारी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
सरकार का तर्क, जनता पर नहीं पड़ेगा बोझ
राज्य सरकार का दावा है कि सेस लगाए जाने के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि यह सेस फर्स्ट सेल प्वाइंट यानी पहली बिक्री के स्तर पर ही लागू किया जाएगा। ऐसे में इसका सीधा असर तेल और डीजल बेचने वाले विक्रेताओं पर पड़ सकता है और उनके मुनाफे में कुछ कमी आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सरकार का कहना है कि आम जनता को राहत देना उनकी प्राथमिकता है।
विभाग जारी करेगा अधिसूचना
प्रदेश में तेल और डीजल पर कितने प्रतिशत सेस लगाया जाएगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह पूरी तरह कर एवं आबकारी विभाग की अधिसूचना के बाद ही साफ हो पाएगा। विभाग द्वारा दरों और नियमों की अधिसूचना जारी होते ही सेस की वसूली शुरू कर दी जाएगी।
करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आय होगी
राज्य सरकार ने इस सेस के जरिये करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान लगाया है। इस आय का उपयोग विशेष रूप से बेसहारा बच्चों और विधवा महिलाओं के कल्याण के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूती मिलेगी और जरूरतमंद वर्ग को स्थायी सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
सरकार के इस फैसले को सामाजिक कल्याण की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजरें कर एवं आबकारी विभाग की अधिसूचना पर टिकी हैं, जिसके बाद सेस की वास्तविक दरों और इसके क्रियान्वयन की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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