सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। गोविंदपुर के बहुचर्चित जमीन कारोबारी संजीव सिंह हत्याकांड में करीब एक दशक बाद न्याय की घड़ी आई है। सोमवार को एडीजे-5 मंजू कुमारी की अदालत ने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए झामुमो ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष दुबराज नाग और मृतक के चचेरे भाई जितेंद्र सिंह को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। सजा के बिंदु पर 23 जनवरी को फैसला सुनाया जाएगा।
हालांकि, इस फैसले में अभियोजन पक्ष को झटका भी लगा, क्योंकि हत्या में शामिल माने जा रहे अन्य 6 आरोपियों-मंगल टुडू, चित्रो सरदार, मिथुन चक्रवर्ती, डोमनिक सैमसंग, मोहन कच्छप और सरफुद्दीन अंसारी-को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
घटना 12 मई 2016 की है। जमीन कारोबारी संजीव सिंह अपनी बाइक से सरजामदा से टेल्को स्थित अपने घर लौट रहे थे। सुबह करीब 10:45 बजे, जैसे ही वे गोविंदपुर थाना क्षेत्र के जोजोबेड़ा रेलवे फाटक के पास पहुंचे, वहां पहले से घात लगाए बाइक सवार अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। संजीव सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी।
पुलिस जांच में सामने आया था कि हत्या की साजिश राजनीतिक रंजिश और जमीन कारोबार के विवाद में रची गई थी। दुबराज नाग पर हत्या की साजिश रचने का मुख्य आरोप था। वहीं, संजीव के चचेरे भाई जितेंद्र सिंह की भूमिका ने सबको चौंका दिया था, जिसने अपने ही भाई की मुखबिरी कर उसकी हत्या का मार्ग प्रशस्त किया।
अभियोजन पक्ष दुबराज और जितेंद्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में सफल रहा, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ गवाहों के मुकरने या ठोस सबूत न होने के कारण उन्हें संदेह का लाभ मिला।
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