बिहार वन विभाग व बीएनएचएस की टीम
मिथिलेश कुमार, बिहपुर। बिहार वन विभाग और बीएनएचएस के संयुक्त तत्वाधान में बिहार में आयोजित एशियाई जल पक्षी गणना-2026 की शुरुआत घटोरा वेटलैंड से हुई। रविवार को भागलपुर डीएफओ आशुतोष कुमार, रेंज आफिसर कंपनी कुमार, बिहार एशियाई जल पक्षी गणना के कार्डिनेटर दीपक कुमार झुन्नू, कार्डिनेटर ज्ञान चंद ज्ञानी, गौरव सिन्हा, चंदन, कबीर व वत्स निशान कृष्णन ने घटोरा वेटलैंड में पक्षियों की गणना की।
डीएफओ ने बताया कि यहां रविवार की गणना में 72 प्रजातियों के 10 हजार से अधिक पक्षियों का आकलन किया गया। जिसमें 70 फीसदी प्रवासी व 30 फीसदी ही देसी पक्षी थे। यह घटोरा वेटलैंड में अब तक की वार्षिक गणना में मिले पक्षियों की सर्वाधिक संख्या है। 18 जनवरी से 8 फरवरी तक यह पक्षी गणना पूरे राज्य में की जा रही है।
उम्मीद से अधिक
डीएफओ आशुतोष ने कहा कि मध्य एशियाई देश, यूरोप, मंगोलिया, चीन, लेह-लद्दाख आदि क्षेत्र से आने वाले ये पक्षी बड़ी संख्या में घटोरा वेटलैंड में शीतकालीन प्रवास करते हैं।
इधर, बिहार एशियाई जल पक्षी गणना के कार्डिनेटर दीपक कुमार झुन्नू ने बताया कि यहां प्रवासी पक्षियों में सबसे अधिक बत्तख प्रजाति के लालसर, सिंकपर, चैता, छोटा लालसिर, चकवा, राजहंस, कलहंस तथा कुसिया चाहा शामिल हैं।
अन्य पक्षियों में घोंघिल, विभिन्न प्रकार के बगुले, हेरोन, सैंडपाइपर, स्टोनचैट, जलमुर्गी, मुनिया, नीलकंठी, ग्रासबर्ड इत्यादि पक्षियों की संख्या उम्मीद से अधिक दिखी।
पर्यावरणविद सह एशियाई जल पक्षी गणना के कार्डिनेटर श्री झुन्नू कहते हैं कि घटोरा वेटलैंड की भौगोलिक स्थिति, शांत वातावरण, सुरक्षित जलीय आवास, प्रचुर जलीय व वनस्पति भोजन की उपलब्धता प्रवासी व देसी पक्षियों को आकर्षित करता है।
घटोरा को रामसर साइट बनाने की मांग करते हुए सोनवर्षा मुखिया नीनारानी व अजय उर्फ लाली कुंवर ने कहा कि यह वेटलैंड नवंबर से अप्रैल तक देसी व प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुंजायमान रहता है। |