नई दिल्ली। आम बजट 2026 में इनकम टैक्स को लेकर अहम घोषणाओं की उम्मीद कम है लेकिन अलग-अलग इंडस्ट्री बॉडीज़ ने अपने प्री-बजट मेमोरेंडम में पर्सनल इनकम टैक्स के मोर्चे पर कई सुधारों का सुझाव जरूर दिया है। इनमें एक सुझाव आयकर अधिनियम की धारा 80c (Section 80c) को लेकर है, जिसमें डिडक्शन लिमिट को बढ़ाने की मांग की गई है। अगर सरकार इस पर राहत देती हो तो ओल्ट टैक्स रिजीम वाले टैक्सपेयर्स के लिए यह एक बड़ी सौगात होगी।
दरअसल, अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने सेक्शन 80C की डिडक्शन लिमिट को ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹3.5 लाख करने का सुझाव दिया है। अभी, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत सेक्शन 80C में टैक्सपेयर्स को कुछ टैक्स बचाने वाले इन्वेस्टमेंट पर ₹1.5 लाख तक की कटौती क्लेम करने की इजाज़त मिलती है। हालांकि, यह फायदा सिर्फ़ उन्हीं टैक्सपेयर्स को मिलता है जिन्होंने पुराना टैक्स सिस्टम चुना है। नया टैक्स सिस्टम सेक्शन 80C के तहत कटौती की इजाज़त नहीं देता है।
कितनी बढ़नी चाहिए 80c के तहत डिडक्शन लिमिट?
AMCHAM के अनुसार, सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ाने से व्यक्तियों और HUF के लिए टैक्स बचाने में मदद मिलेगी। इसलिए इस इंडस्ट्री बॉडी ने अपने प्री-बजट मेमोरेंडम 2026-27 में कहा, “अभी, ITA 1961 की धारा 80C (ITA 2025 की धारा 123) के तहत कुल कटौती ₹150,000/- है अब इसे बढ़ाकर ₹350,000 किया जाना चाहिए।“
इंडस्ट्री बॉडी ने पुराने टैक्स रिजीम के सेक्शन 80C के तहत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम के संबंध में डिडक्शन लिमिट को मौजूदा ₹1.5 लाख से बढ़ाकर कम से कम ₹2.5 लाख करने का भी सुझाव दिया है।
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12 साल से 80c में बदलाव नहीं
धारा 80C कटौती की सीमा बढ़ाने की मांग नई नहीं है। पहले भी, कई इंडस्ट्री बॉडीज़ और टैक्स एक्सपर्ट्स ने सरकार को धारा 80C की सीमा बढ़ाकर ₹3 लाख करने का सुझाव दिया था। बजट 2014 से धारा 80C की सीमा ₹1.5 लाख पर ही बनी हुई है, जबकि सरकार ने नए टैक्स सिस्टम में कई प्रावधानों के ज़रिए बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को टैक्स में राहत दी है। |