search
 Forgot password?
 Register now
search

क्या आप जानते हैं 20 जनवरी को मिला था भारत को पहला परमाणु रिएक्टर, पंडित नेहरू ने दिया था नाम ‘अप्सरा’

cy520520 1 hour(s) ago views 573
  

भारत का पहला परमाणु रिएक्टर (Picture Courtesy: Facebook)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के इतिहास में 20 जनवरी की तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज है, क्योंकि आज ही के दिन भारत ने परमाणु युग की दहलीज पर अपना पहला कदम रखा था। यह गौरवशाली क्षण तब आया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एशिया के पहले परमाणु शोध रिएक्टर \“अप्सरा\“ को राष्ट्र को समर्पित किया। इसी खास मौके पर आइए जानते हैं भारत की इस महान तकनीकी उपलब्धि के पीछे की दिलचस्प कहानी।
क्यों रखा गया इसका नाम \“अप्सरा\“?

जब इस रिएक्टर को पहली बार शुरू किया गया, तो इसमें से शानदार नीली किरणें निकली थीं। इन खूबसूरत किरणों को देखकर पंडित नेहरू इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसका नाम \“अप्सरा\“ रख दिया। मुंबई के ट्रोम्बे में स्थापित यह रिएक्टर भारत के लिए केवल एक मशीन नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के भविष्य की एक नई दिशा थी।

  

(Picture Courtesy: Facebook(
डॉ. होमी जहांगीर भाभा का विजन

अप्सरा रिएक्टर का डिजाइन किसी विदेशी ने नहीं, बल्कि भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने साल 1955 में तैयार किया था। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित था। पंडित नेहरू का मानना था कि यह रिएक्टर भारत की केवल एक तकनीकी जीत नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत किस ऊंचाई तक जाएगा।
तकनीक और क्षमता

\“अप्सरा\“ एक लाइट वॉटर स्विमिंग पूल टाइप रिएक्टर था। इसकी क्षमता की बात करें तो इसमें एक बार में एक मेगावाट थर्मल बिजली का उत्पादन होता था। इसका मुख्य उद्देश्य परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करना, वैज्ञानिक रिसर्च को बढ़ावा देना और नए वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण देना था।
चिकित्सा और विज्ञान में क्रांति

अप्सरा के चालू होने से भारत को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली, रेडियो आइसोटोप का प्रोडक्शन। इन आइसोटोप्स का इस्तेमाल चिकित्सा, पाइपलाइनों के निरीक्षण और फूड प्रिजर्वेशन जैसे कई क्षेत्रों में किया जाता है। इसने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की नींव रखी।
दुनिया का इकलौता \“न्यूक्लियर म्यूजियम\“

रिटायर होने के बाद अप्सरा रिएक्टर ने एक और नया इतिहास रचा। बाद में इसे एक म्यूजियम में बदल दिया गया। दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी न्यूक्लियर रिएक्टर को म्यूजियम का रूप दिया गया हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत के इस गौरवशाली सफर को देख सकें।
यह भी पढ़ें- संविधान की रक्षा के लिए दीवार बनकर खड़े हो गए थे नानीभाई पालखीवाला, कैसे बने देश के सबसे बड़े वकील?


यह भी पढ़ें- क्यों भारतीय मोबाइल नंबरों के आगे लगा होता है +91? आखिर क्या बताता है यह कोड
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
150740

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com