जागरण संवादददाता, लखनऊ। आवारा कुत्तों से अभी निजात मिल ही नही पाई थी कि बंदरों के उत्पात से निवासी परेशान हैं। जंगलों से दूर अब मुहल्लों में उनका ठिकाना आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। शहर के हर मुहल्ले में लोग बंदरों से परेशान हैं। दुगावां के मनीष कुमार साहू ने बताया कि बंदरों के उत्पात से पूरा मुहल्ला परेशान है। कुछ लोगो ने छत पर जाल लगवा लिया है। हम लोग छत पर बैठने से भी डरने लगे हैं। बंदरों का झुंड खतरनाक है।
आलमबाग गोपालपुरी निवासी विवेक खरे ने बताया कि पहले यहां एक भी बंदर नहीं थे। कुछ समय से क्षेत्र में बंदरों का आतंक बहुत बढ़ गया। बंदर घर-घर लगे सोलर पैनल को क्षतिग्रस्त करने के साथ-साथ पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां के संजय सिन्हा ने बताया कि ठंड के मौसम में धूप सेकने के लिए कोई छत पर नहीं जाता है।
पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि आसपास की दुकानों और घरों से बंदर सामान उठा ले जा रहे हैं। सोलर पैनल को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। पुराना सरदारी खेड़ा निवासी पवन शर्मा ने बताया कि हालत यह हो गई है कि हर घर में गुलेल और पटाखे मिलेंगे, लेकिन बंदरों को इसका भी भय नहीं है। संजय गांधी मार्ग निवासी सरस्वती दुबे ने बताया कि छत पर लगे गमले और पौधों को बंदर बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।
चंदरनगर पानी की टंकी के नीचे बंदर का आशियाना रहता है। वन विभाग की टीम वहां छापा मारे तो बंदर पकड़े जा सकते हैं। रश्मिखंड-एक में बंदरों की बढ़ती समस्या लोगों की मुसीबत बन गई है। यहां के निवासी बीपी शुक्ल ने बताया कि कालोनी के पार्कों, आवासीय भवनों की छतों, बालकनियों और सड़कों पर बंदर मौजूद रहते हैं।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार बंदरों द्वारा लोगों पर हमला करने और काटने की घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिससे नागरिकों में भय बना रहता है। योजना भवन कालोनी के अभय अग्रवाल ने बताया कि बंदर का आतंक ऐसा है कि घर से बाहर निकलना मुश्किल है। आशियाना के सेक्टर-एन निवासी अशोक गुप्ता ने बताया कि बंंदरों से आम लोेगों का जीना दूभर हो गया है। छत तो छोड़िए घर के बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
बंदरों का आता है झुंड
बंदर अकेले नहीं झुंड में चलते हैं। निरालानगर के सी-113 निवासी राकेश सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बंदरों की समस्या सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के पीछे, मस्जिद के सामने भयंकर रूप ले चुकी है। सुबह से ही बंदरों का आतंक शुरू हो जाता है। बच्चों का स्कूल जाना, नागरिक का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। एक साथ 100-150 बंदरों का झुंड आता है। बंदर इतने खूंखार हो गए हैं कि उन्हें भय नहीं रहता।
लालकुआं के मनीष राजपूत ने बताया कि शहर में बंदरों के हमले से एक किशोरी की मौत और घायल होने की घटनाएं सुनाई पड़ने लगी हैं। न तो वन विभाग और न ही नगर निगम जिम्मेदारी लेता है। पीएमओ कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री के पोर्टल तक शिकायत कर चुके हैं, लेेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। / |
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