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रेरा का देहरादून के फरार बिल्डर शाश्वत गर्ग पर शिकंजा, आर्केडिया हिलाक्स में फ्लैट बिक्री पर रोक

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करोड़ों रुपये हड़पकर फरार बिल्डर शाश्वत गर्ग की गोल्डन एरा इंफ्राटेक पर रेरा का शिकंजा। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, देहरादून। निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पकर परिवार समेत फरार बिल्डर शाश्वत गर्ग की कंपनी गोल्डन एरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड पर शिकंजा कसते हुए उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारटी (रेरा) ने मसूरी रोड स्थित आर्केडिया हिलाक्स सोसाइटी में फ्लैट बिक्री पर रोक लगा दी है।

रियल एस्टेट सेक्टर में मनमानी पर रेरा ने फ्लैट खरीदारों की शिकायतों को गंभीर मानते हुए परियोजना के सभी विवादित फ्लैटों पर यथास्थिति (स्टेटस-क्वो) बनाए रखने के आदेश दिए हैं। रेरा सदस्य नरेश सी. मठपाल की ओर से जारी आदेश में जिलाधिकारी को फ्लैटों की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाने को कहा गया है।

रेरा में गोल्डन एरा इंफ्राटेक के निदेशक शाश्वत गर्ग, उनके पिता अतुल गर्ग, मां अंजलि गर्ग, चावा प्रतीक गर्ग व अन्य निदेशकों के विरुद्ध नौ अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें फ्लैट बुकिंग के बावजूद समय पर विक्रय विलेख निष्पादित न करने, देरी, नियमों के उल्लंघन और खरीदारों को मानसिक व आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।

शिकायतकर्ता राजेंद्र सिंह नकोटी, चैतन्य बहुगुणा, कुंवर पाल सिंह, अमित राणा, मणि महेश एग्रोटेक, विजया देवी कौडिया, अमित राणा, रणवीर पुरी व अशिमा अग्रवाल ने आरोप लगाया कि मसूरी रोड स्थित आर्केडिया हिलाक्स परियोजना के कई फ्लैटों का संपूर्ण भुगतान कर दिया गया है व कब्जा भी प्राप्त हो चुका है, इसके बावजूद प्रमोटर द्वारा अब तक रजिस्ट्री नहीं कराई गई है।

रेरा ने सभी मामलों की प्रकृति और तथ्यों की समानता को देखते हुए प्राधिकरण ने इनकी संयुक्त सुनवाई की। यह स्थिति रेरा अधिनियम की धारा 11, 14 और 17 का स्पष्ट उल्लंघन मानी गई है। प्राधिकरण ने यह माना कि रजिस्ट्री में देरी के कारण खरीदारों को गंभीर परेशानी उठानी पड़ रही है, क्योंकि सर्किल रेट और पंजीकरण शुल्क में वृद्धि का सीधा आर्थिक बोझ उन पर पड़ रहा है। रेरा का यह आदेश उन फ्लैट खरीदारों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो भुगतान के बावजूद रजिस्ट्री और कानूनी सुरक्षा से वंचित रहते हैं। प्राधिकरण ने कहा कि खरीदारों के अधिकारों से समझौता करने वाली कंपनियों पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

तीसरे पक्ष के अधिकार सृजन की आशंका
रेरा ने आदेश में इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि प्रमोटर द्वारा विवादित फ्लैटों को किसी तीसरे पक्ष को बेचने या उन पर अधिकार सृजित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि जब तक मामलों का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक फ्लैटों पर किसी भी प्रकार का विक्रय, हस्तांतरण या अधिकार सृजन नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी को दिए गए निर्देश
रेरा ने देहरादून के जिलाधिकारी और संबंधित उप जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि परियोजना से जुड़े फ्लैटों के विक्रय विलेख निष्पादन पर प्रभावी रूप से रोक सुनिश्चित की जाए। आदेश की प्रति को तत्काल अनुपालन के लिए जिला प्रशासन को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही प्राधिकरण ने गोल्डन एरा इंफ्राटेक और उसके निदेशकों को अपना पक्ष रखने के लिए एक और अवसर प्रदान किया है। उन्हें उत्तर पत्र व आपत्ति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 25 फरवरी को निर्धारित की गई है।

17 अक्टूबर से परिवार संग गायब है शाश्वत गर्ग
आर्केडिया हिलाक्स परियोजना में निवेशकों को फ्लैट आवंटन व फर्जी तरीके से बैंक लोन लेकर करोड़ों रुपये हड़पकर फरार बिल्डर शाश्वस्त गर्ग, पत्नी साक्षी और शास्वस्त के पिता प्रवीण गर्ग विरुद्ध पुलिस ने लुक आउट सर्कुलर दिसंबर में जारी कर दिया था। तीनों आरोपितों के पासपोर्ट निरस्त किए जा चुके हैं।आरोपितों की तलाश में राजपुर पुलिस व स्पेशल आपरेशन ग्रुप को लगाया गया है। आरोपितों के नेपाल भागने के कुछ प्रमाण मिले हैं, ऐसे में वहां भी संपर्क किया गया है। बिल्डर शाश्वस्त गर्ग पत्नी साक्षी, बेटे रिद्वान, पिता प्रवीण गर्ग और मां अंजली के साथ गत 17 अक्टूबर से गायब हैं। गर्ग परिवार को आखिरी बार शाश्वत के साले सुलभ गोयल के हापुड़ उत्तर प्रदेश स्थित घर पर देखा गया था।

गर्ग की दोनों परियोजना पर है रोक
शाश्वत गर्ग ने पत्नी साक्षी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर देहरादून में दो आवासीय परियोजनाओं पर काम शुरू किया था। जिसमें एक मसूरी रोड पर आर्केडिया हिलाक्स (ग्रुप हाउसिंग) और दूसरी परियोजना इंपीरियल वैली (थानो में प्लाटेड डेवलपमेंट) नाम से है। बिल्डर के गायब होने के बाद इंपीरियल वैली में निवेश करने वाले व्यक्तियों ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। गर्ग परिवार के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए पासपोर्ट पर रोक लगाने की मांग की गई थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पांडे ने शाश्वत, साक्षी व शास्वस्त के पिता प्रवीण गर्ग के पासपोर्ट 27 नवंबर को निरस्त कर दिए थे। रेरा ने इंपीरियल वैली प्रोजेक्ट में खरीद फरोख्त पर पहले ही रोक लगाई हुई है।

पुलिस और ईडी कर रही जांच
आर्केडिया हिलाक्स ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में 21 से अधिक फ्लैट आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतों पर पुलिस गर्ग परिवार के साथ ही उनके दो सालों और कुछ बैंक व वित्तीय संस्थानों के विरुद्ध पहले ही मुकदमा दर्ज कर चुकी है। दो दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी बिल्डर शाश्वत व साक्षी गर्ग के विरुद्ध मनी लाड्रिंग में मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस के साथ ईडी भी आरोपितों की तलाश कर रही है। ब्यूरो आफ इमीग्रेशन ने तीनों आरोपितों शाश्वस्त, साक्षी व प्रवीण गर्ग के विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर जारी किया हुआ है। इससे आरोपितों के किसी अन्य देश जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है।

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