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जिले में 33 हजार से अधिक किसानों की बनी पहचान
जागरण संवाददाता, भभुआ(कैमूर)। कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब किसानों की पहचान केवल नाम से नहीं, बल्कि फार्मर आईडी से तय होगी। सरकार के निर्देश पर जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अब तक 33,199 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। हालांकि यह लक्ष्य का केवल 27.56 प्रतिशत ही है, जबकि बड़ी संख्या में किसान अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं।
कृषि योजनाओं की चाबी बनी फार्मर आईडी
कृषि विभाग के अनुसार बीज अनुदान, फसल सहायता, कृषि यंत्र अनुदान, पीएम किसान जैसी योजनाओं का लाभ पाने के लिए विभाग में निबंधन के बाद फार्मर आईडी बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना फार्मर आईडी वाले किसानों को आगे चलकर सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
जिले में 1.20 लाख से अधिक किसान निबंधित
जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों को मिलाकर 1,20,481 किसान कृषि विभाग में निबंधित हैं। इनमें से 22 जनवरी तक 33,199 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है, जबकि 87,282 किसानों की आईडी बनना अब भी बाकी है।
प्रखंडवार आंकड़ों में दिखी असमान प्रगति
प्रखंडों की स्थिति पर नजर डालें तो नुआव प्रखंड में फार्मर आईडी निर्माण की गति सबसे बेहतर रही है, जहां 36.02 प्रतिशत किसानों की आईडी बन चुकी है। वहीं अधौरा प्रखंड में यह आंकड़ा मात्र 14.95 प्रतिशत है, जो चिंता का विषय है। भभुआ, कुदरा, रामपुर और मोहनियां जैसे प्रखंडों में भी अभी लक्ष्य से काफी पीछे स्थिति है।
अभियान को तेज करने के निर्देश
कृषि विभाग ने शेष किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लिए अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर किसानों से दस्तावेज लेकर आईडी बनाई जा रही है, ताकि कोई भी किसान छूट न जाए।
किसानों से की गई खास अपील
जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि जिन किसानों ने अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है, वे शीघ्र अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या शिविर में पहुंचकर प्रक्रिया पूरी करें। समय रहते आईडी नहीं बनवाने पर भविष्य में किसी भी सरकारी कृषि योजना का लाभ रुक सकता है।
योजनाओं का लाभ सुरक्षित करने का मौका
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फार्मर आईडी किसानों के लिए एक स्थायी पहचान होगी, जिससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे खाते तक पहुंचेगा। ऐसे में यह अभियान किसानों के हित में है और इसमें सक्रिय भागीदारी जरूरी है। |
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