search

इंस्पेक्टर भी कर सकेगा संगठित अपराध की जांच, डीएसपी स्तरीय बाध्यता हटी, हाईकोर्ट के फैसले से पंजाब-हरियाणा को राहत

LHC0088 2026-1-23 14:56:47 views 1070
  

21 मई 2025 को दिए अपने फैसले में हाईकोर्ट ने किया संशोधन।



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। संगठित अपराधों की जांच इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी भी कर सकेगा। डीएसपी स्तरीय बाध्यता को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने समाप्त कर दिया है। इस फैसले से पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य को राहत मिली है। दोनों राज्यों में हर जिले में अलग–अलग विशेष टास्क फोर्स इकाई गठित करने की अनिवार्यता भी हटा दी गई है।

यह आदेश जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने हरियाणा और पंजाब सरकार की ओर से दाखिल संशोधन अर्ज़िया को स्वीकार करते हुए पारित किया। हाईकोर्ट ने 21 मई 2025 के अपने फैसले में निर्देश दिया था कि संगठित अपराध के सभी मामलों की जांच डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) स्तर के अधिकारी करेंगे।

हरियाणा में हर जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और पंजाब में हर जिले में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) की इकाई गठित की जाएगी, जिनकी कमान वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में होगी। इन निर्देशों का उद्देश्य संगठित अपराध और गैंगवार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था।

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि उसके अधिकतर निर्देशों का पालन किया जा चुका है, लेकिन हर एक संगठित अपराध के मामले में डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि राज्य में वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या सीमित है।
सरकार की तरफ से यह रखा गया तर्क

सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 से एक समर्पित एसटीएफ पहले से कार्यरत है और दिल्ली से सटे तथा संगठित अपराध से अधिक प्रभावित जिलों में इसकी फील्ड यूनिट्स पहले ही तैनात हैं। पंजाब सरकार ने भी अदालत को अवगत कराया कि राज्य में डीएसपी रैंक के अधिकारियों की भारी कमी है।

अप्रैल 2025 में गठित एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) पहले से ही एक वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में राज्य स्तर पर काम कर रही है। सरकार ने तर्क दिया कि हर जिले में अलग–अलग एजीटीएफ इकाइयां बनाना मौजूदा संसाधनों पर अत्यधिक बोझ डालेगा।
दोनों राज्यों की दलील सुनने के बाद निर्देशों में संशोधन

दोनों राज्यों की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों में संशोधन कर दिया। अब अदालत ने यह स्पष्ट किया है किसंगठित अपराध के मामलों की जांच इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी भी कर सकेंगे, लेकिन ऐसी जांच डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में ही होगी।

इसके साथ ही अदालत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा सरकार अपने संसाधनों और संबंधित क्षेत्रों में संगठित अपराध की वास्तविक स्थिति को देखते हुए यह तय कर सकती हैं कि किस जिले में एसटीएफ या एजीटीएफ की अलग इकाई बनानी आवश्यक है या नहीं।

हाईकोर्ट ने कहा कि हर क्षेत्र में संगठित अपराध की समस्या एक जैसी नहीं होती, इसलिए हर जिले में एक जैसा ढांचा बनाना जरूरी नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर की जांच इंस्पेक्टर कर रहा है, जांच की गुणवत्ता खराब नहीं मानी जा सकती, बशर्ते उस पर वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी बनी रहे।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
167067