जागरण संवाददाता, कन्नौज: युद्ध के दौरान सुरक्षा को लेकर पुलिस लाइन में ब्लैकआउट और माकड्रिल का आयोजन किया गया। एक साथ कई धमाके होने से पुलिस लाइन में धुआं-धुआं हो गया। झोपड़ी और मकानों में फंसे लोगों को निकाल कर अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास हुआ।
दमकल टीम ने तत्काल आग पर काबू पाया। वहीं, सायरन बजते ही सुनियोजित ब्लैकआउट के तहत पूरा शहर 15 मिनट अंधेरे में डूबा रहा।
शासन के निर्देश पर सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम के रूप में मनाया गया। इस दौरान अदम्य साहस, वीरता, युद्ध या कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस लाइन के परेड मैदान में जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार की मौजूदगी में माकड्रिल और ब्लैकआउट का आयोजन हुआ।
इस दौरान हवाई हमला करने के लिए बनाई गई झोपड़ी और प्रतीकात्मक मकानों पर बम फेंककर कई धमाके किए गए। इससे पूरा मैदान धुआं-धुआं हो गया।
सायरन बजते ही मौजूद पुलिस कर्मी और आपदा मित्र जमीन पर लेट गए। रखे गए मेज-कुर्सी के नीचे छिपने का तरीका बताया गया। इसके बाद देखते-देखते झोपड़ी और मकानों में लगी आग पर दमकल टीम ने काबू पाया। इसके बाद स्वास्थ्य टीमों ने तत्काल हताहत लोगों को अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास किया।
शाम छह बजते ही शहर में पुलिस के वाहनों के सायरन गूंजने लगे। इससे छह बजकर 15 मिनट तक ब्लैकआउट के तहत शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र अंधेरे में डूब गए। जिलाधिकारी ने कहा कि युद्ध के दौरान सबसे बड़ी चुनौती जन और धनहानि बचाने की होती है।
अगर देशवासी पहले से प्रशिक्षित होते हैं, तो इस तरह की हानि से बचा जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हमले या किसी तरह की घटना होने पर खुद के साथ दूसरों की जान बचाना ही सच्ची देशभक्ति है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया है। साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रति हर किसी को समर्पित रहना चाहिए। |
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