थानेदार को बताया था काल सेंटर में काम करती थी, संदेह होने पर खुला पूरा खेल। सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किसी गुप्त सूचना या तकनीकी अलर्ट से नहीं, बल्कि एक युवती की शिकायत से हुआ। काल सेंटर में काम कर चुकी युवती अपने एक परिचित द्वारा की गई अभद्रता की शिकायत लेकर 15 दिन पहले थाने पहुंची थी। सामान्य दिखने वाली इस शिकायत ने पुलिस को उस साइबर ठगी नेटवर्क तक पहुंचा दिया, जो महीनों से गोरखपुर में बैठकर अमेरिका तक जालसाजी फैला रहा था।
बातचीत में चिलुआताल थानेदार ने जब युवती से उसकी नौकरी के बारे में जानकारी ली तो उसने बताया कि वह एक काल सेंटर में काम करती थी, जहां अमेरिका के लोगों को स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी जानकारी दी जाती थी। युवती ने यह भी बताया कि उसने कुछ दिन पहले ही नौकरी छोड़ दी है। इस जानकारी ने थानेदार को सतर्क कर दिया, क्योंकि जिस तरह का काम युवती बता रही थी, वह स्थानीय स्तर पर संदिग्ध प्रतीत हुआ। वर्ष 2023 में बेतियाहाता में फर्जी काल सेंटर पकड़ा गया था।
कार्रवाई में चिलुआताल के थानेदार भी शामिल थे। काल सेंटर के संचालक का नाम और अन्य विवरण पूछने के बाद जांच शुरू हुई तो इसका सिरा लखनऊ तक पहुंच गया। छानबीन में सामने आया कि काल सेंटर से जुड़े कुछ नाम लखनऊ में दर्ज एक साइबर ठगी के मुकदमे में पहले से वांछित हैं। इसके बाद चिलुआताल पुलिस ने साइबर सेल की टीम के साथ मिलकर गहन जांच शुरू की।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लखनऊ के मुकदमे में वांछित चल रहे अभिषेक पांडेय और रौनक पाठक भी करीमनगर स्थित इसी काल सेंटर से जुड़े हुए हैं। सूचना पुख्ता होते ही पुलिस ने छापा मारा। छापे के दौरान रूपेश के साथ अभिषेक मौके पर मिल गया, लेकिन रौनक फरार हो चुका था।
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पुलिस अधिकारियों की माने तो यह कोई नया तरीका नहीं था। इसी तरह का पैटर्न पहली बार 17 अगस्त 2023 को सामने आया था, जब साइबर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने बेतियाहाता में चल रहे फर्जी काल सेंटर का पर्दाफाश किया था। उस समय कोलकाता और झारखंड के साहिबगंज जिले के आरोपित मोबाइल नेटवर्क की स्पीड बढ़ाने का झांसा देकर ब्रिटिश नागरिकों से ठगी कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम मुंबई और कोलकाता के दो बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। साइबर सेल इन खातों के जरिए पूरे नेटवर्क की चेन खंगाल रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल ट्रेल सामने आएंगे, वैसे-वैसे इस साइबर ठगी रैकेट से जुड़े और नाम उजागर होंगे। |
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