तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ से हो रही वर्षा का प्रभाव बनारस तक नहीं पहुंचेगा। यानी बनारस में भी इस बार भी मघबदरिया नहीं बरसेगी। इस वर्षा का प्रभाव पूर्वी उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में ही हल्का-फुल्का पहुंचेगा।
मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 27 जनवरी से आरंभ होने वाले वर्षा के दूसरे चरण में भी बनारस में बूंदाबांदी नहीं होने वाली, हां तराई क्षेत्र से आजमगढ़, मऊ तक इसका हल्का सा प्रभाव दिख सकता है। शुक्रवार को चार से 12 किमी प्रति घंटा तक चली पछुआ के प्रभाव से तापमान में बहुत मामूली सी गिरावट दर्ज की गई लेकिन आसमान साफ रहने व प्रखर धूप खिली रहने से वातावरण पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखा।
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि शनिवार को हल्के-फुल्के बादल हवा के झाेंके के साथ इधर आ सकते हैं, इनकी वजह से अधिकतम तापमान थोड़ा सा कम होगा तो न्यूनतम तापमान में थोड़ी वृद्धि होगी, रात में ठंड का प्रभाव कम महसूस होगा।
शुक्रवार को बीएचयू क्षेत्र में दिन के अधिकतम तापमान में 0.7 डिग्री से. कम हुआ और सामान्य से 3.3 डिग्री सेल्सियस ऊपर 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा। न्यूनतम तापमान में 0.8 डिग्री सेल्सियस की कमी आई और यह सामान्य से 0.4 डिग्री सेल्सियस नीचे 9.2 डिग्री सेल्सियसरहा। बाबतपुर क्षेत्र में अधिकतम तापमान में 0.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई और यह सामान्य से 2.8 डिग्री सेल्सियस अधिक 25.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
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उधर न्यूनतम तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस घटकर सामान्य से 0.9 डिग्री सेल्सियस नीचे 7.8 डिग्री सेल्सियस रहा। बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. मनाेज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पश्चिम में हो रही वर्षा का पूर्वी उत्तर प्रदेश के वातावरण पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेेगा। हालांकि, शनिवार को तापमान में थोड़ी और गिरावट आ सकती है। फिर भी यह सामान्य के आसपास ही रह सकता है।
धूप खिलेगी और हवा की गति बढ़ी तो सुबह शाम हल्की सी गलन बढ़ सकती है। इसके पीछे 26 जनवरी को आने वाले एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ का भी इधर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि पश्चिमी गतिविधियों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिर वर्षा फिर हो सकती है। |
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