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फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग से 300 करोड़ की ठगी, कोलकाता-लखनऊ से चार जालसाज गिरफ्तार; बिना पूछे चुराते थे ओटीपी

Chikheang Yesterday 19:56 views 594
  

फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़। प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए क्राइम ब्रांच की टीम ने कोलकाता और लखनऊ से चार जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान विश्वजीत मंडल, आशीष अग्रवाल, राजीव शाह और हैंडलर शुभम शर्मा के रूप में हुई है। आरोपित फर्जी एप और टेलीग्राम ग्रुप से जोड़कर पीड़ितों को अधिक रिटर्न का लालच देकर ठगते थे।
बैंक खातों में 19 लाख रुपये फ्रीज किए

आरोपितों ने 105 फर्जी कंपनियों के नाम पर 260 से अधिक अकाउंट खोले हुए थे। जांच में गिरोह के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 2,567 एनसीआरपी शिकायतें मिली हैं, जिसमें 300 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की रकम शामिल है। यह गिराेह चार से पांच साल से सक्रिय था। पुलिस ने इनके पास से 39 मोबाइल, 258 सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और चेक बुक, चार लैपटाप और अन्य सामान बरामद किया है और बैंक खातों में 19 लाख रुपये फ्रीज किए है।
पर्सनल डिटेल स्कैमर के साथ शेयर की

क्राइम ब्रांच के उपायुक्त आदित्य गौतम के मुताबिक, आरोपितों को पकड़ने के लिए इंस्पेक्टर सतेंद्र खारी के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। तकनीकी जांच में पता चला कि आरोपित भारतीय हैंडलर से म्यूल अकाउंट खरीदते थे। अकाउंट की जानकारी (नंबर, आइएफएससी, रजिस्टर्ड मोबाइल, कस्टमर आइडी) स्कैमर के साथ शेयर की जाती थी।
ट्रांजेक्शन ओटीपी अपने आप शेयर करवाते

लिंक किए गए फोन का सिम कार्ड एक्टिव रहता था और माइटी एप या एपीके फाइल जैसे एप इंस्टाल कराए जाते थे, ताकि ट्रांजेक्शन ओटीपी अपने आप शेयर हो जाएं। टीम ने आरोपितों को पकड़ने के लिए आइ4सी प्लेटफार्म डेटा की जांच की और 200 से अधिक बैंक शाखाओं से मनी ट्रेल और केवाईसी का पता लगाया, जिससे फर्जी प्रोफाइल से खोले गए चालू खातों का भंडाफोड़ हुआ। इसके बाद टीम को पता चला कि ठगों ने कोलकाता में फर्जी कंपनियां बनाई हुई हैं।
पुलिस कर रही तलाश

टीम ने सबसे पहले टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपित विश्वजीत मंडल को बंगाल से गिरफ्तार किया। इसकी निशानदेही पर आशीष अग्रवाल को दबोचा गया। वह अकाउंट बेचता था। इसकी निशानदेही पर टीम ने राजीव शाह और हैंडलर शुभम शर्मा को पकड़ा। राजीव शाह ने पुलिस को बताया कि उसने पूरे साइबर फ्राड को कंबोडिया-बेस्ड आपरेटर्स से जोड़ा, जो क्रिप्टो ट्रांजेक्शन संभालते हैं और पूर्वी यूपी, कोलकाता और बिहार में अपने साथियों के नाम बताए। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर करते थे संपर्क

पूछताछ में पता चला कि आरोपित इंटरनेट मीडिया वाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद ऑनलाइन ट्रेडिंग निवेश कर उच्च मुनाफा का वादा किया जाता था। लोगों को फंसता देख वह उन्हें वेंटुरा सिक्योरिटीज, गो मार्केट ग्लोबल और आइपीओ स्टाक ट्रेडिंग जैसे नामों वाले टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ते थे। ठग पीड़ितों को एप डाउनलोड करवाते थे, जिसमें नकली मुनाफे के साथ हेरफेर वाले ट्रेडिंग डेशबोर्ड दिखाए जाते थे। ठगी होने के बाद आरोपित उन्हें ब्लाॅक कर देते थे।

यह भी पढ़ें- फर्जी दस्तावेजों से शेयरों की अवैध बिक्री, करोड़ों के कारपोरेट घोटाले में ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर
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