सरकारी विभागों की लापरवाही से बीते तीन सालों में दस से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। उत्तर प्रदेश नोएडा में बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में वहां की पुलिस कार्रवाई में जुटी है, जिम्मेदार अधिकारियों व अन्य लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है, यह होना भी चाहिए।
अब ऐसे जानलेवा हादसे अपनी औद्योगिक नगरी में भी विगत वर्षों में हुए हैं, जिसमें सरकारी विभागों की लापरवाही से बीते तीन सालों में दस से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, पर यहां जिम्मेदार अधिकारियों पर किसी तरह की ठोस कार्रवाई होने की बजाय अधिकांश मामले सिर्फ मुकदमा दर्ज होने तक ही सीमित रह गए।
किसी भी मामले में लापरवाह अधिकारी या अन्य आरोपितों के खिलाफ किसी प्रकार की सजा तो दूर की बात, वह गिरफ्तार तक नहीं हुए। लापरवाही के आरोप में नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त, एनएचएआइ के अधिकारियों और बिजली निगम के अधिकारियों तक पर मुकदमा दर्ज हो चुका है, मगर इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लापरवाही से मौत के कई मामले तो ऐसे भी हैं, जिनमें मुकदमा तक भी दर्ज नहीं हुआ।
ये हुए बड़े जानलेवा हादसे, जिनमें कार्रवाई नहीं हुई
- वर्ष 2025 के अगस्त माह में गोंछी नाले में कार समेत गिरने से तीन युवकों की मौत हो गई थी। हादसे के दौरान नाला खुला था और उसकी फेंसिंग नहीं की गई थी। इस मामले में पुलिस केवल जांच तक सीमित रही किसी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ था।
- वर्ष 2024 के सितंबर माह में रात के समय ओल्ड फरीदाबाद के रेलवे अंडरपास में भरे पानी में डूबकर गुरुग्राम स्थित एक निजी बैंक के शाखा प्रबंधक सह उपाध्यक्ष और कैशियर की मौत हो गई थी। इस मामले में एडीसी व पुलिस के स्तर पर जांच की गई थी, मगर किसी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सका।
- 31 जुलाई 2024 को मोहना रोड पर जलभराव के दौरान खुले नाले में डूबकर एक युवक की मौत हो गई थी। यह मामला मानवाधिकार आयोग में विचाराधीन है।
- 28 दिसंबर 2021 को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर नाले के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर दो युवकों की मौत हो गई थी, इस मामले में एनएचएआइ के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, मगर उसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- अप्रैल 2023 में सेक्टर-85 में एक शराब ठेका के पास खड़े व्यक्ति पर बिजली का खंभा गिर गया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसमें खेड़ीपुल थाना में बिजली निगम के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया था। इसमें आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
तत्कालीन निगमायुक्त पर दर्ज हो चुका है मामला
सितंबर 2022 में सेक्टर-23 में करंट लगने से हुई एक व्यक्ति की मौत मामले में पीड़ित के स्वजन की शिकायत पर मुजेसर थाना की पुलिस ने अप्रैल 2023 को नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त व बिजली निगम के एक्सईएन, एसडीओ, जेई को भी आरोपित बनाया गया था, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बीएनएस 105 में मुकदमा दर्ज करे पुलिस : एडवोकेट राजेश
लायर्स सोशल जस्टिस फोरम के अध्यक्ष अधिवक्ता राजेश खटाना ने बताया कि पहले पुलिस आइपीसी 304ए के तहत मुकदमा दर्ज करती थी। उसमें आरोपित को थाने से ही जमानत मिल जाती थी। नए कानून के तहत पुलिस को चाहिए कि बीएनएस 105 में मुकदमा दर्ज करें। इसमें आरोपित को तुरंत जमानत नहीं मिलेगी। साथ ही पुलिस को चाहिए कि पीड़ित के साथ मिलकर मजबूती से केस लड़े। अदालत में मजबूत चालान पेश किया जाए, जिससे लापरवाही के आरोपित अधिकारी-कर्मचारियों को कड़ी सजा मिल सके।
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इनकी भी जा चुकी है जान
- 09 जुलाई 2025: दुर्गा बिल्डर के पास खुले नाले में डूबने से सिक्यूरिटी सुपरवाइजर योगेश की मौत
- फरीदाबाद में 15 मार्च 2025: पर्वतीय कालोनी में डिस्पोजल के लिए खोदे गड्ढा में गिरकर युवक की मौत
- 31 जुलाई 2024: मोहना रोड पर खुले नाले में गिरकर बीटेक के छात्र की मौत
- 02 अगस्त 2024: भारत कालोनी में सांड़ की टक्कर से प्रापर्टी डीलर रवि कुमार की मौत
- फरीदाबाद में 15 दिसंबर 2022: सेक्टर-31 में सड़क बने गड्ढे के चलते स्कूटी से गिरकर बच्ची की मौत
- 5 नवंबर 2022: एयरफोर्स रोड मोड़ पर खुले नाले में गिरकर 11 वर्षीय किशोर की मौत
- 10 अप्रैल 2022: सेक्टर-56 में खुले मैनहोल में गिरकर एक बैंक कर्मी हरीश वर्मा की मौत
किसी भी मामले में पुलिस जांच करती है और साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाता है कि जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, उस पर कार्रवाई बनती है या नहीं। अगर किसी मुकदमे में गिरफ्तारी नहीं हुई तो इसका यही अर्थ है कि पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। - यशपाल सिंह, पुलिस प्रवक्ता |