Google DeepMind के CEO डेमिस हसाबिस ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि भारत को एप्लाइड एआई (Applied AI) पर फोकस करना चाहिए। डेमिस हसाबिस का मानना है कि भारत को एप्लाइड एआई पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि इंडस्ट्री पहले से ही फाउंडेशनल एआई मॉडल ऑफर करने वालों से भरी हुई है जैसे कि ChatGPT, Grok AI, Perplexity आदि।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में Moneycontrol के साथ बातचीत में डेमिस हसाबिस ने कहा, ”भारतीयों को एआई पसंद है और उन्हें इस्तेमाल करना अच्छा लगता है। मुझे लगता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में यह टेक्नोलॉजी बड़े बदलाव करने जा रही है।”

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उन्होंने आगे कहा, ”मैं कहना चाहूंगा कि अप्लाइड एआई अभी इस समय फोकस करने के लिए सही जगह है..फाउंडेशन एआई मॉडल प्रोवाइडर्स के साथ काम करिए..”

भारत में इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच डेमिस हसाबिस का बयान और ज्यादा जरूरी हो गया है। भारत में इस बात पर लगातार बहस बढ़ती जा रही है कि देश को फाउंडेशनल एआई मॉडल पर ध्यान देना चाहिए या फिर एआई के एप्लिकेशन पहलुओं पर। ये चर्चाएं इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत एआई कंपनियों के लिए सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है और Google, Meta व Amazon जैसी बड़ी टेक कंपनियों के लिए भी एक प्रमुख मार्केट है।
कई टेक दिग्गजों जैसे इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि का मानना है कि भारत को लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) बनाने की बड़ी प्रतिस्पर्धी दौड़ में शामिल होने के बजाय दुनिया की एआई यूज़-केस कैपिटल बनना चाहिए। वहीं दूसरी ओर Sarvam AI के विवेक राघवन जैसे कारोबारियों का तर्क है कि सॉवरेन (sovereign) एआई मॉडल के बिना देश एक “डिजिटल कॉलोनी” बनकर रह जाएगा।
Yoshua Bengio जैसे वैश्विक एआई पायनियर्स ने पहले भी एआई के भू-राजनीतिक प्रभावों के बारे में बात की है। जनवरी 2025 में Moneycontrol से बात करते हुए Bengio ने कहा था, “जो देश अपना खुद का एआई सिस्टम बनाने में निवेश कर रहे हैं, उन्हें भू-राजनीतिक बढ़त मिलेगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारों को फाउंडेशनल मॉडल के विकास के लिए फंडिंग और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।
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