चीन में परी जैसे लोग दिखाने वाला मशरूम वैज्ञानिकों के लिए बना रहस्य (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन के एक हिस्से में हर साल सैकड़ों लोग एक अजीब शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। उन्हें छोटे-छोटे परी जैसे लोग दिखाई देने लगते हैं, जो दीवारों पर चढ़ते हैं, फर्नीचर पर बैठे दिखते हैं और दरवाजे के नीचे से निकलते नजर आते हैं।
यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि एक खास मशरूम से जुड़ी सच्ची और रहस्यमयी बीमारी है। इस मशरूम का नाम है लानमाओआ एशियाटिका। यह मशरूम जंगलों में पाइन के पेड़ों के पास उगता है।
चीन के युन्नान प्रांत में यह मशरूम जून से अगस्त के बीच बाजारों में बिकता है, रेस्टोरेंट के मेन्यू में होता है और घरों में भी खाया जाता है। लोग इसे बहुत स्वादिष्ट मानते हैं। लेकिन इसकी सबसे जरूरी बात यह है कि इसे अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए। अगर यह अधपका रह गया तो खाने वाले को हैलुसिनेशन यानी भ्रम होने लगता है।
कैसे होता है भ्रम?
युन्नान में एक मशरूम हॉट-पॉट रेस्टोरेंट में तो सर्वर खाने से पहले 15 मिनट का टाइमर भी लगता है। चेतावनी दी जाती है कि टाइमर से पहले खाने पर छोटे लोग दिख सकते हैं। यूटा यूनिवर्सिटी के शोध छात्र कॉलिन डोमनाउर इस मशरूम पर रिसर्च कर रहे हैं।
उनका कहना है कि युन्नान की स्थानीय संस्कृति में इस मशरूम और इससे होने वाले भ्रम को लोग जानते हैं, लेकिन बाकी दुनिया के लिए अब भी यह रहस्य है। कॉलिन को इसके बारे में पहली बार अपनी माइकोलॉजी की पढ़ाई के दौरान पता चला था।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले
1991 में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने युन्नान के ऐसे मामलों का जिक्र किया था, जिनमें लोगों को मशरूम खाने के बाद \“लिलिपुटियनहैलुसिनेशन\“ हुए। इसका मतलब है कि बहुत छोटे इंसान, जानवर या काल्पनिक जीव दिखना।
मरीजों ने बताया कि ये छोटे लोग हर जगह दिखते थेकपड़ों पर, बर्तनों पर और आंख बंद करने पर तो और भी साफ। इससे पहले 1960 के दशक में वैज्ञानिक गॉर्डन वॉसन और रोजर हाइम ने पापुआ न्यू गिनी में भी ऐसे मशरूम की कहानियां सुनी थीं, लेकिन तब उनके रसायन की पहचान नहीं हो पाई।
हाल की रिसर्च में क्या पता चला?
2015 में इस मशरूम को आधिकारिक तौर पर लानमाओआ एशियाटिका नाम दिया गया। 2023 में कॉलिन डोमनाउर खुद युन्नान गए, बाजारों से मशरूम खरीदे और लैब में उनके जीन की जांच की। चूहों पर किए गए टेस्ट में भी वही असर दिखापहले तेज उत्तेजना, फिर सुस्ती और कम हरकत।
फिलीपींस में पाए गए छोटे गुलाबी मशरूम और चीन के बड़े लाल मशरूम दिखने में अलग थे, लेकिन जेनेटिक टेस्ट से साबित हुआ कि दोनों एक ही प्रजाति हैं।
असर कितने समय तक रहता है?
इस मशरूम से होने वाला भ्रम 12 से 24 घंटे और कभी-कभी कई दिनों या हफ्ते तक रहता है। कई मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में रखना पड़ता है। चक्कर, बेहोशी और लंबे साइड इफेक्ट्स की वजह से कॉलिन ने खुद अब तक कच्चा मशरूम नहीं खाया है।
1909 से 2021 के बीच ऐसे 226 केस दर्ज हुए, जिनमें लोगों ने बिना मशरूम खाए भी छोटे लोग दिखने की शिकायत की। इनमें से एक-तिहाई लोग पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मशरूम के अध्ययन से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दिमाग में हैलुसिनेशन कैसे शुरू होते हैं। इससे भविष्य में नई दवाएं भी बन सकती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि दुनिया की अब तक 5% से भी कम फंगस प्रजातियों की पहचान हो पाई है। फंगस में दवाओं का बड़ा खजाना छुपा हो सकता है, जिसे अभी खोजना बाकी है। |
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