अस्तित्व के संकट में मोरहर नदी
संवाद सहयोगी, रतनी फरीदपुर (जहानाबाद)। प्रखंड क्षेत्र से होकर बहने वाली मोरहर नदी गाद से पूरी तरह भर चुकी है। नदी की नियमित उड़ाही नहीं होने के कारण कई स्थानों पर इसका अस्तित्व लगभग समाप्त होता दिख रहा है। अब नदी की पेट में किसान खेती करने लगे हैं।
मोरहर नदी झारखंड के हजारीबाग, डुमरिया इमामगंज क्षेत्र से निकलती है। इसके बाद यह शेरघाटी, पंचानपुर और टेकारी होते हुए जहानाबाद जिले के रतनी फरीदपुर और जहानाबाद प्रखंड में लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तय करती है और अंततः पुनपुन नदी में मिल जाती है।
कभी सिंचाई और जल निकासी का प्रमुख साधन रही यह नदी आज उपेक्षा की शिकार बन चुकी है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नदी में अत्यधिक गाद जमा हो जाने के कारण पानी का बहाव लगभग बंद हो गया है।
नदी के अंदर और किनारे खेती करने लगे
इसी कारण लोग मजबूरी में नदी के अंदर और किनारे खेती करने लगे हैं। लेकिन यही खेती बरसात के दिनों में किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बन जाती है। थोड़ी सी बारिश होने पर भी नदी का पानी फैलकर आसपास के खेतों में घुस जाता है, जिससे सैकड़ों एकड़ में बोए गए धान की फसल जलमग्न हो जाती है।
किसानों ने कहा कि हर साल इस समस्या को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया जाता है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। नदी की उड़ाही नहीं होने से तटबंध भी समतल हो चुके हैं, जिस कारण पानी आसानी से ओवरफ्लो होकर खेतों में फैल जाता है।
नदी की जल्द से जल्द व्यापक उड़ाही कराने की मांग
इससे फसल नष्ट होने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मोरहर नदी की जल्द से जल्द व्यापक उड़ाही कराई जाए, ताकि इसका प्राकृतिक स्वरूप बहाल हो सके। साथ ही तटबंधों को मजबूत करने और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की भी आवश्यकता है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा और किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। |