गणतंत्र दिवस पर नॉन-वेज बैन पर बवाल। (फाइल)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ओडिशा के कोरापुट जिले में नॉन-वेज खाने पर बैन लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दक्षिणी ओडिशा के कोरापुट जिले में ज्यादातर आदिवासी आबादी रहती है। अपने पहाड़ी इलाकों और अलग-अलग तरह के खनिज भंडारों के लिए जाना जाने वाला यह जिला शायद दी कभी सुर्खियों में आता है।
लेकिन, बीते दिनों, यहां नॉन-वेज पर बैन लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। यह बैन धार्मिक वजह से नहीं लगाया गया था, बल्कि जिला मजिस्ट्रेट ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर लगाया था।
नॉन-वेज बैन रहा नाकाम
तहसीलदारों, बीडीओ और कार्यकारी अधिकारियों को लिखे पत्र में, जिला मजिस्ट्रेट मनोज सत्यवान महाजन ने कल उन्हें अपने-अपने इलाकों में इस रोक को लागू करने का निर्देश दिया।
जिला मजिस्ट्रेटन ने वापस लिया आदेश
आदेश में कहा गया था कि उन्हें मांस, चिकन, मछली, अंडे और अन्य नॉन-वेज खाने की चीजों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करना होगा। हालांकि यह नोटिफिकेशन ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया और इसका टिकना मुमकिन भी नहीं था, क्योंकि स्टडीज से पता चलता है कि ओडिशा की 3 प्रतिशत से भी कम आबादी शाकाहारी खाना खाती है। जनता के विरोध के बाद आज आखिरकार नॉन-वेज बैन का आदेश वापस ले लिया गया।
जिला मजिस्ट्रेट ने एक नए नोटिफिकेशन में साफ किया कि पहले बैन का आदेश पूरी तरह से जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस तैयारी समिति के सुझाव पर जारी किया गया था और उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसे तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया गया है। |