राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने उन वीर लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत को विदेशी शासन से आज़ाद कराने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा में लगे सशस्त्र बलों की तैयारियों की तारीफ की और नागरिकों की रक्षा के लिए उनके समर्पण को सराहा। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, संविधान के मूल्यों और नागरिकों की साझा जिम्मेदारियों पर भी बात की।
देश की प्रमुख उपलब्धियों का जिक्र
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने देश की प्रमुख उपलब्धियों का ज़िक्र किया और लोगों से एकजुट होकर एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और आगे बढ़ते भारत के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने एकता, समावेशिता और मजबूत इच्छाशक्ति को देश की ताकत बताया। 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों में रहने वाले सभी भारतीय इस दिन को पूरे जोश के साथ मनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर सोचने का मौका देता है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता आंदोलन की ताकत से 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ और देश की दिशा बदल गई।
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न्याय, स्वतंत्रता, समानता...
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन ने 15 अगस्त 1947 को भारत का भाग्य बदल दिया। उसी दिन देश आज़ाद हुआ और भारत ने अपना भविष्य खुद तय करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि जब संविधान पूरी तरह लागू हुआ, तब भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना और विदेशी शासन की व्यवस्था से पूरी तरह मुक्त हो गया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया के सबसे बड़े गणराज्य का आधार है। इसमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे जैसे मूल्य शामिल हैं, जो हमारे गणराज्य की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने इन प्रावधानों के जरिए देश में राष्ट्रवाद और एकता की मजबूत नींव रखी।
वंदे मातरम के महत्व पर भी बात
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने वंदे मातरम के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम देश की एक भावनात्मक और गीतात्मक राष्ट्रीय प्रार्थना है। उन्होंने याद दिलाया कि महान राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्य भारती ने अपनी तमिल रचना “वंदे मातरम येनबोम” के माध्यम से इस गीत को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया था। महान राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में “वंदे मातरम येनबोम” गीत लिखा था, जिसका अर्थ है—“आइए हम वंदे मातरम का जाप करें।” इस गीत के जरिए उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को वंदे मातरम की भावना से जोड़ा। बाद में इस गीत के अनुवाद दूसरी भारतीय भाषाओं में भी हुए, जो काफी लोकप्रिय बने। श्री अरबिंदो ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम हमारी गीतात्मक राष्ट्रीय प्रार्थना है, जो देशभक्ति की भावना को मजबूत करती है।उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में देश ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह दिन पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया, ताकि युवाओं को नेताजी की देशभक्ति और उनके नारे “जय हिंद” की मजबूत भावना से प्रेरणा मिल सके। |
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