बिहार बोर्ड का सख्त आदेश
डिजिटल डेस्क,पटना। बिहार बोर्ड की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में इस बार सिर्फ सवालों की तैयारी काफी नहीं होगी, बल्कि समय की पाबंदी भी पास होने की पहली शर्त बनेगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने परीक्षा को कदाचारमुक्त और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रवेश नियमों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है।
बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों के लिए कोई छूट नहीं होगी। परीक्षा शुरू होने से ठीक आधा घंटा पहले केंद्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाएगा और इसके बाद किसी भी हाल में प्रवेश नहीं मिलेगा। बोर्ड का कहना है कि यह नियम सभी केंद्रों पर समान रूप से लागू होगा।
पहले पहुंचे, तभी मिलेगी परीक्षा की इजाजत
पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे शुरू होगी, लेकिन परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे तक ही केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। सुबह 9 बजे गेट बंद कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2 बजे से होगी, जिसके लिए 1 बजे से प्रवेश मिलेगा और 1:30 बजे के बाद दरवाजा पूरी तरह बंद रहेगा।
तारीखें तय, तैयारी समय से जरूरी
बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा 1 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक आयोजित होगी, जबकि मैट्रिक की परीक्षा 17 फरवरी से होगी। बोर्ड ने साफ कहा है कि देर से पहुंचने की जिम्मेदारी पूरी तरह परीक्षार्थी की होगी।
सख्ती के पीछे बोर्ड की मंशा
बोर्ड का मानना है कि सख्त समय-सारिणी से परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन, सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहेगी। इसी कारण अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन, केंद्राधीक्षकों और परीक्षा ड्यूटी में तैनात अधिकारियों से निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की गई है।
रिकॉर्ड संख्या में छात्र होंगे शामिल
इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में 15 लाख 12 हजार 963 परीक्षार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए 1,699 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। वहीं इंटर परीक्षा में 13 लाख 17 हजार 846 छात्र-छात्राएं परीक्षा देंगे और इसके लिए 1,762 केंद्र निर्धारित किए गए हैं।
बोर्ड का साफ संदेश
बिहार बोर्ड का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है, परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले घड़ी देखना जरूरी है। एक छोटी-सी लापरवाही पूरे साल की मेहनत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए समय से पहले पहुंचना ही सफलता की असली कुंजी है। |