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UGC बिल ने सवर्णों को क्यों किया नाराज? 6 पॉइंट में समझें विरोध के मेन कारण

Chikheang 2026-1-26 17:26:47 views 734
  



जागरण संवाददाता, लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम-2026’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश से लेकर कई राज्यों तक इस मुद्दे की गूंज सुनाई दे रही है। सवर्ण समाज ने इस नियमावली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जहां सरकार इसे समानता बढ़ाने और जातिगत भेदभाव समाप्त करने की पहल बता रही है।

वहीं, विरोध करने वालों का कहना है कि यह नियम बड़े पैमाने पर असमानता को बढ़ावा देने वाला है। इस मसले को लेकर केंद्र सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

यह भी पढ़ें- UGC बिल के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में भी कही ये बात

  • नए नियमों के तहत धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान और दिव्यांगता के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना अनिवार्य होगा। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांग छात्रों व कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
  • यूजीसी के निर्देश के अनुसार हर विश्वविद्यालय और कालेज में अब समान अवसर केंद्र की स्थापना अनिवार्य होगी। यह केंद्र वंचित वर्गों के छात्रों और कर्मचारियों को शैक्षणिक, वित्तीय और सामाजिक मामलों में मार्गदर्शन देगा। इसके संचालन के लिए एक समता समिति गठित की जाएगी, जिसमें शिक्षक, कर्मचारी, छात्र और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • समिति भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही हर संस्थान में समता हेल्पलाइन शुरू करना अनिवार्य किया गया है। पीड़ित छात्र या कर्मचारी ऑनलाइन पोर्टल, ई-मेल या हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
  • शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का प्रविधान किया गया है, जबकि गंभीर मामलों में पुलिस को तुरंत सूचना देने की व्यवस्था होगी। कैंपस में निगरानी के लिए समता समूह (इक्विटी स्क्वाड) बनाए जाएंगे, जो छात्रावास, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला और अन्य संवेदनशील स्थानों पर नजर रखेंगे।
  • हर विभाग या छात्रावास में एक समता दूत (इक्विटी एम्बेसडर) भी नामित किया जाएगा। समता समिति के निर्णय से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर विश्वविद्यालय लोकपाल के पास अपील कर सकेगा। यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी समिति बनाएगा और संस्थानों से वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट मांगेगा।  
  • नियमों का पालन न करने पर विश्वविद्यालयों को यूजीसी योजनाओं से वंचित करने, ऑनलाइन-ओडीएल कार्यक्रम बंद करने और मान्यता सूची से हटाने तक की कड़ी कार्रवाई हो सकती है। डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि यूजीसी का गजट नोटिफिकेशन मिल गया है, इसके अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने यूजीसी अध्यक्ष को पत्र लिखकर जताई नाराजगी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन विनियमन–2026 को लेकर विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे सामाजिक संतुलन के लिए नुकसानदेह बताया है।  

यूजीसी को पत्र लिखकर नियम लागू करने से पहले सुझाव और आपत्तियों को सुनने की मांग की है और कहा है कि यह प्रविधान उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई के माहौल को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन नियम बनाते समय सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है। नया नियम सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का माध्यम बन सकता है।

यूजीसी का उद्देश्य भेदभाव रोकना होना चाहिए, न कि किसी वर्ग को असुरक्षित बनाना। भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही भेदभाव से जुड़े मामलों के लिए प्रविधान मौजूद हैं, इसलिए अलग से समता समिति बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की। कहा कि यदि समिति बने तो उसका काम भर्तियों और पदोन्नति में आरक्षित वर्ग का चयन सुनिश्चित करना होना चाहिए।

एमएलसी ने उच्च शिक्षा सुधार के सुझाव भी दिए। कहा कि विश्वविद्यालयों को शोध का केंद्र बनाना होगा और अनुसंधान में निवेश बढ़ाना जरूरी है। विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं, शोध परिसर, सरकार-निजी क्षेत्र की साझेदारी, बेहतर वेतन और अकादमिक स्वतंत्रता पर जोर दिया। यूजीसी का लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट शिक्षा और शोध केंद्र बनाना होना चाहिए, जो आत्मनिर्भर और मजबूत भारत का निर्माण करें।

UGC बिल के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा

यूजीसी बिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया है।

अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस ऑफिसर हैं। उनका कहना है कि वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत हैं। साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून पर विरोध भी जताया है। सिटी मजिस्ट्रेट की एक तस्वीर सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकर अपने आवास के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।

यूजीसी कानून के खिलाफ हरिद्वार जा रहे थे यति नरसिंहानंद को पुलिस ने रोका

यूजीसी के नए कानून के विरोध में गंगा किनारे धरना देने जा रहे डासना धाम के महंत महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज को पुलिस ने नारसन बार्डर पर रोक लिया। प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया और वापस लौटा दिया। इस दौरान उनके समर्थकों ने विरोध भी किया।

डासना मंदिर के महंत महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने यूजीसी के विरोध में हरिद्वार में गंगा के किनारे धरने का ऐलान किया था। रविवार को वह अपने समर्थकों के साथ हरिद्वार जा रहे थे। इस पर जैसे ही वह नारसन बार्डर पर पहुंचे तो पुलिस प्रशासन ने उनके वाहनों को रोक लिया।
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